नई दिल्ली। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान नए मतदाताओं के पंजीकरण के लिए इस्तेमाल होने वाले Form 6 में जोड़ी गई अतिरिक्त घोषणा को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने अपनी स्थिति स्पष्ट की है। अदालत ने कहा कि उसने न तो इस बदलाव को मंजूरी दी है और न ही इसे खारिज किया है। यह मुद्दा उसके सामने विचार के लिए आया ही नहीं था।
Bar & Bench की 12 अक्टूबर 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची तथा न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने कहा कि बिहार में SIR मामले की सुनवाई के समय संशोधित Form 6 अस्तित्व में नहीं था। इसलिए 5 अक्टूबर को अदालत की टिप्पणियों को फॉर्म में किए गए बदलाव की स्वीकृति या अस्वीकृति के रूप में नहीं पढ़ा जाना चाहिए।
निर्वाचन आयोग ने 26 सितंबर की प्रेस विज्ञप्ति में कहा था कि SIR के दौरान Form 6 के साथ जोड़ी गई अतिरिक्त घोषणा को सुप्रीम कोर्ट ने बरकरार रखा है। इसके बाद 5 अक्टूबर को अदालत ने कहा था कि उसने संशोधित Form 6 को मंजूरी नहीं दी है।
12 अक्टूबर को पीठ ने इस अंतर को स्पष्ट किया। अदालत के अनुसार, संशोधित फॉर्म से जुड़ा प्रश्न उसके सामने आया ही नहीं था, इसलिए मंजूरी या अस्वीकृति—दोनों में से किसी निष्कर्ष का दावा नहीं किया जा सकता।
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि आयोग का कहना रहा है कि Form 6 में औपचारिक संशोधन नहीं किया गया, बल्कि SIR के दौरान अतिरिक्त घोषणा जोड़ी गई। इस तरह विवाद का एक अहम पहलू यह है कि अतिरिक्त घोषणा को लागू करने की कानूनी प्रक्रिया और उसकी स्थिति क्या है।
अदालत की टिप्पणी का अर्थ यह नहीं है कि उसने अतिरिक्त घोषणा को अवैध घोषित कर दिया है। इसी तरह, यह भी नहीं कहा जा सकता कि सुप्रीम कोर्ट ने इस बदलाव को वैध ठहरा दिया है। अदालत ने केवल यह स्पष्ट किया कि संबंधित मुद्दे पर उसके सामने विचार नहीं हुआ था।
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