नई दिल्ली। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा है कि Next-Gen GST का उद्देश्य कर दरों को कम और तर्कसंगत बनाना तथा कर अनुपालन को आसान करना है। The Indian Express में प्रकाशित अपने लेख में उन्होंने कहा कि GST के नौ साल के अनुभव और करदाताओं तथा राज्यों के अनुभवों के आधार पर अगली प्रक्रिया सुधारों को आगे बढ़ाया जा रहा है।

सीतारमण के अनुसार, GST की शुरुआत 2017 में अप्रत्यक्ष कराधान के लिए एक साझा राष्ट्रीय ढांचे के रूप में हुई थी। Next-Gen GST को उन्होंने इसी प्रक्रिया का अगला चरण बताया। उनके लेख के मुताबिक, GST दरों में बदलाव 22 सितंबर 2025 से प्रभावी हुए थे, जबकि प्रक्रिया से जुड़े अगले सुधारों के प्रस्ताव 7 अक्टूबर को GST Council के सामने आने हैं।

वित्त मंत्री ने लेख में अक्टूबर 2025 से जुलाई 2026 के बीच रिपोर्ट की गई टैक्सेबल सप्लाई के मूल्य में पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में 25.8% वृद्धि का उल्लेख किया। उनके अनुसार, अपेक्षाकृत हल्के दर ढांचे के साथ रिपोर्टेड आर्थिक गतिविधियों का विस्तार हुआ है। उन्होंने इसे सुधार के लिए सकारात्मक आधार बताया।

GST संग्रह के आंकड़ों का उल्लेख करते हुए सीतारमण ने कहा कि अप्रैल-सितंबर 2026 में सकल GST संग्रह ₹12.46 लाख करोड़ रहा, जो पिछले वर्ष की समान अवधि से 11.6% अधिक है। जून से सितंबर तक हर महीने सालाना आधार पर दोहरे अंक की वृद्धि दर्ज हुई और इन चार महीनों का संयुक्त संग्रह लगभग 15% की गति से बढ़ा। लेख के अनुसार, रिफंड के बाद शुद्ध संग्रह में भी छमाही के दौरान 10.4% वृद्धि हुई।

सीतारमण ने कहा कि रिपोर्टेड टैक्सेबल सप्लाई में वृद्धि सभी 11 क्षेत्रीय समूहों और सभी प्रमुख राज्यों में हुई। उन्होंने इसे भारत जैसी विविध अर्थव्यवस्था के संदर्भ में महत्वपूर्ण बताया।

लेख में उपभोक्ताओं को की गई रिपोर्टेड बिक्री यानी B2C बिक्री में 26.7% वृद्धि का भी उल्लेख है। सीतारमण के अनुसार, यदि कर राहत कीमतों में दिखाई देती है तो परिवारों के पास अन्य जरूरतों या बचत के लिए अधिक गुंजाइश हो सकती है।

वित्त मंत्री ने छोटे और मध्यम उद्यमों के लिए राष्ट्रीय बाजार की उपयोगिता पर जोर दिया। उनके अनुसार, GST का साझा ढांचा छोटे कारोबारों को अपने स्थानीय क्षेत्र से आगे ग्राहकों तक पहुंचने में मदद कर सकता है। उन्होंने Tier-2 और Tier-3 शहरों में कारोबार के विस्तार और स्थानीय स्तर पर निवेश तथा रोजगार के अवसरों का भी उल्लेख किया।

लेख के अनुसार, अगस्त के अंत तक केंद्रीय और राज्य क्षेत्राधिकारों में GST पंजीकरण की संख्या लगभग 1.71 करोड़ थी, जो एक वर्ष पहले की तुलना में करीब 15% अधिक है। अप्रैल-जुलाई 2026 की कर अवधियों के लिए नियत तारीख तक दाखिल किए गए GSTR-3B रिटर्न की संख्या भी पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में 12.6% अधिक बताई गई है।

सीतारमण ने इनपुट टैक्स क्रेडिट को कारोबारियों के लिए महत्वपूर्ण बताया। लेख में कहा गया है कि सुधार के बाद कर देनदारी का क्रेडिट के माध्यम से भुगतान करने की हिस्सेदारी बढ़ी, जबकि टैक्सेबल सप्लाई की तुलना में जमा क्रेडिट में कमी आई।

वित्त मंत्री के अनुसार, अप्रैल-सितंबर 2026 के दौरान लगभग ₹1.80 लाख करोड़ का रिफंड किया गया। उन्होंने कहा कि कारोबारियों को देय राशि लौटाना एक बेहतर काम करने वाली कर प्रणाली का हिस्सा है और रिफंड प्रक्रिया में अधिक पूर्वानुमेयता से कारोबारों को खरीद और उत्पादन की बेहतर योजना बनाने में मदद मिल सकती है।

अप्रैल-सितंबर के दौरान राज्यों की कुल SGST प्राप्तियां, जिसमें IGST settlement में उनका हिस्सा भी शामिल है, लगभग 16% बढ़ीं। उन्होंने कहा कि इन संसाधनों से बुनियादी ढांचे और सार्वजनिक सेवाओं में निवेश को समर्थन मिलता है।

आगे के सुधारों में पंजीकरण, रिटर्न, रिफंड, विवाद और इनपुट टैक्स क्रेडिट के बेहतर प्रवाह से जुड़े प्रस्ताव शामिल हैं। लेख के मुताबिक इनका उद्देश्य अनुपालन में लगने वाले समय और लागत को कम करना है। ये प्रस्ताव 7 अक्टूबर को GST Council के सामने आने हैं। GST व्यवस्था के परिपक्व होने से सुधार के अगले चरण के लिए मजबूत आधार तैयार हुआ है। वित्त मंत्री ने कर प्रणाली में स्पष्टता, निश्चितता और करदाताओं के प्रति सम्मान को आगे भी मार्गदर्शक सिद्धांत बताया।