लखनऊ। समाजवादी पार्टी ने राज्यसभा चुनाव में अपने दूसरे उम्मीदवार के नाम का पत्ता खोला तो सियासी गलियारों में ‘सरप्राइज’ शब्द को जैसे नया अर्थ मिल गया। उद्योग जगत से जुड़े धनराज परिमल नाथवानी को उम्मीदवार बनाकर सपा ने बुधवार को उन्हें राज्यसभा की दौड़ में उतार दिया। अखिलेश यादव की मौजूदगी में नाथवानी और पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव रामगोपाल यादव ने नामांकन पत्र दाखिल किया।

कुछ दिन पहले तक अखिलेश यादव जिस ‘सरप्राइज’ उम्मीदवार की बात कर रहे थे, उसका खुलासा होते ही यह स्पष्ट हो गया कि सपा ने इस बार राजनीति की पारंपरिक सूची से बाहर जाकर एक कारोबारी और संस्थागत पृष्ठभूमि वाले चेहरे पर दांव लगाया है।

धनराज नाथवानी का प्रमुख परिचय उद्योग जगत से जुड़ा है। वह रिलायंस इंडस्ट्रीज से जुड़े वरिष्ठ कार्यकारी हैं और कंपनी के कई अहम कारोबारी क्षेत्रों की जिम्मेदारियां संभालते हैं। उनकी पेशेवर भूमिका कारोबार के साथ-साथ कॉरपोरेट मामलों, वित्त, खरीद, अनुबंध और सूचना प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों तक फैली रही है।

एक परिवार, दो राजनीतिक खेमे

धनराज नाथवानी की उम्मीदवारी का सबसे चर्चित पहलू उनके पारिवारिक राजनीतिक संदर्भ से जुड़ा है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, उनके पिता परिमल नाथवानी भी रिलायंस समूह से जुड़े रहे हैं और जून 2026 में NDA के समर्थन से झारखंड से राज्यसभा के लिए चुने गए। अब उसी परिवार के धनराज नाथवानी को समाजवादी पार्टी ने उत्तर प्रदेश से राज्यसभा उम्मीदवार बनाया है। इससे एक ही परिवार के दो सदस्यों की अलग-अलग राजनीतिक खेमों में मौजूदगी चर्चा का विषय बन गई है।

हालांकि, परिवार के दो सदस्यों की राजनीतिक भूमिकाओं को सीधे एक-दूसरे से जोड़ना उचित नहीं होगा। किसी उम्मीदवार की राजनीतिक पहचान और उसके फैसलों को उसके व्यक्तिगत राजनीतिक रुख और सार्वजनिक भूमिका के आधार पर ही देखा जाना चाहिए।

क्रिकेट की पिच से मंदिर के प्रांगण तक

नाथवानी की पहचान सिर्फ कॉरपोरेट दफ्तरों तक सीमित नहीं है। वर्ष 2022 में उन्हें गुजरात क्रिकेट एसोसिएशन का निर्विरोध अध्यक्ष चुना गया था। गुजरात में फुटबॉल प्रशासन से भी उनका जुड़ाव रहा है। अब राजनीति की नई पिच पर उनका नाम सामने आया है। क्रिकेट की पिच और संसद की पिच के नियम भले अलग हों, लेकिन नाथवानी की सार्वजनिक प्रोफाइल में दोनों क्षेत्रों का जुड़ाव जरूर दिखाई देता है।

खेल प्रशासन के अलावा उनकी भूमिका धार्मिक, पर्यावरण, वन्यजीव, शिक्षा और विरासत से जुड़े संस्थानों तक भी बताई गई है। वह द्वारकाधीश मंदिर प्रशासनिक समिति के उपाध्यक्ष हैं। गुजरात स्टेट बोर्ड फॉर वाइल्डलाइफ और नाथद्वारा मंदिर बोर्ड से भी उनके जुड़ाव का उल्लेख मिलता है।

इस तरह नाथवानी की सार्वजनिक प्रोफाइल में कारोबार, क्रिकेट, फुटबॉल, मंदिर प्रशासन, पर्यावरण और वन्यजीव संरक्षण जैसे कई क्षेत्र दिखाई देते हैं। अब राज्यसभा के नामांकन के साथ उनकी प्रोफाइल में राजनीति का एक नया अध्याय जुड़ गया है।

सपा के ‘सरप्राइज’ उम्मीदवार के रूप में सामने आए धनराज नाथवानी के सामने अब कॉरपोरेट बोर्डरूम और खेल प्रशासन से अलग संसदीय राजनीति की चुनौती है। राज्यसभा में उनकी भूमिका कैसी रहती है और वह किन मुद्दों को उठाते हैं, यह आगे की राजनीतिक तस्वीर को स्पष्ट करेगा।