नई दिल्ली/लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच सीटों के बंटवारे को लेकर चल रही खींचतान के बीच सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने बुधवार को दिल्ली में हुई INDIA ब्लॉक की अहम बैठक से दूरी बनाए रखी। बैठक में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर संयुक्त आंदोलन की रणनीति और मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग पर विचार होना था।
अखिलेश की गैरमौजूदगी ऐसे समय हुई है जब उत्तर प्रदेश में दोनों दलों के बीच संभावित सीट बंटवारे को लेकर सार्वजनिक बयानबाजी तेज हुई है। India Today के अनुसार, कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम ने कम से कम 150 सीटों पर चुनाव लड़ने की बात कही है और सभी 403 सीटों के लिए तैयारी का भी उल्लेख किया। इसके विपरीत, रिपोर्ट के मुताबिक सपा कांग्रेस को करीब 80–90 सीटें देने के पक्ष में है। रायबरेली और अमेठी जैसी सीटों को लेकर भी सपा का रुख अलग बताया गया है।
कांग्रेस सांसद इमरान मसूद की अखिलेश की अनुपस्थिति पर टिप्पणी के बाद दोनों दलों के बीच राजनीतिक चर्चा और तेज हुई है। हालांकि, सपा ने अखिलेश की गैरमौजूदगी का कारण राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन प्रक्रिया को बताया है। कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने भी कहा कि उन्होंने अखिलेश से बात की थी और नामांकन कार्यक्रम के कारण वह बैठक में व्यक्तिगत रूप से शामिल नहीं हो सके। सपा की ओर से मोहिबुल्लाह नदवी और हरेंद्र मलिक बैठक में पहुंचे।
ऐसे में अखिलेश की अनुपस्थिति को लेकर दो पक्ष सामने हैं—सपा और कांग्रेस इसे नामांकन कार्यक्रम से जोड़ रहे हैं, जबकि राजनीतिक विश्लेषण में इसे सीट बंटवारे को लेकर चल रही असहमति की पृष्ठभूमि में देखा जा रहा है। बैठक में डीएमके और आम आदमी पार्टी की अनुपस्थिति ने भी विपक्षी गठबंधन की मौजूदा स्थिति को लेकर चर्चा बढ़ाई है।
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