मुरादाबाद। मुरादाबाद में शस्त्र लाइसेंस जारी करने के आंकड़े इन दिनों चर्चा में हैं। तत्कालीन जिलाधिकारी डॉ. राजेंद्र पैंसिया के करीब साढ़े चार माह के कार्यकाल में 40 शस्त्र लाइसेंस जारी किए गए। इनमें 14 लाइसेंस भाजपा के मंडल अध्यक्षों के हैं। वहीं करीब 25 आवेदन अब भी लंबित बताए जा रहे हैं। खास बात यह है कि जिले में पहले से ही दो हजार से अधिक शस्त्र लाइसेंस के आवेदन लंबित हैं।
डॉ. राजेंद्र पैंसिया ने पांच मई को मुरादाबाद के जिलाधिकारी का कार्यभार संभाला था। 21 सितंबर को उनका तबादला कारागार प्रशासन एवं सुधार विभाग में विशेष सचिव के पद पर हो गया। इस दौरान शस्त्र लाइसेंस के लिए 60 से अधिक आवेदन किए गए। इनमें से करीब 40 पर लाइसेंस जारी होने की प्रक्रिया पूरी हुई।
जारी किए गए 40 लाइसेंसों में भाजपा के 14 मंडल अध्यक्ष शामिल हैं। इनमें 13 जिला भाजपा कमेटी और एक महानगर कमेटी से जुड़े मंडल अध्यक्ष बताए गए हैं। भाजपा जिलाध्यक्ष आकाश पाल के मुताबिक जिला कमेटी से जुड़े मंडल अध्यक्षों ने काफी पहले शस्त्र लाइसेंस के लिए आवेदन किया था। इनमें 13 के लाइसेंस जारी हो चुके हैं।
महानगर भाजपा अध्यक्ष गिरीश भंडूला के अनुसार महानगर कमेटी से जुड़े 10 मंडल अध्यक्षों ने आवेदन किया था। इनमें एक का लाइसेंस जारी हुआ है, जबकि अन्य आवेदन लंबित हैं।
जिन भाजपा मंडल अध्यक्षों के लाइसेंस जारी होने की जानकारी सामने आई है, उनमें कांठ के अंकुश चौहान, छजलैट की आंचल चौधरी, पाकबड़ा के दीपक चौधरी, अगवानपुर के संजय विश्नोई, ठाकुरद्वारा देहात के हरिओम सिंह, ठाकुरद्वारा नगर के दीपक वाल्मीकि, डिलारी के हरपाल सिंह सैनी, मूंढापांडे के नीरज चंद्रा, बिलारी के महेंद्र सिंह सैनी, खावरी अब्बल के विकास गुप्ता व दयाराम मौर्य, नमैनी पहाड़पुर के पारस शर्मा, महमूदपुर माफी के रवि कुमार पासी और सिविल लाइंस के सोमपाल प्रजापति शामिल हैं।
सत्यापन में देरी से अटके आवेदनकरीब 10 मंडल अध्यक्षों के आवेदनों में पुलिस सत्यापन रिपोर्ट समय पर नहीं आने की बात सामने आई है। रिपोर्ट आने से पहले ही तत्कालीन डीएम का तबादला हो गया। इसके अलावा अन्य लोगों के आवेदन भी लंबित हैं।जिले में लंबे समय से शस्त्र लाइसेंस के लिए आवेदन करने वाले लोगों की संख्या दो हजार से अधिक बताई जा रही है। इनमें वर्ष 2018 से लंबित आवेदन भी शामिल हैं। कई आवेदकों को पुलिस सत्यापन की वैधता अवधि समाप्त होने के बाद दोबारा सत्यापन कराना पड़ा है।
शस्त्र लाइसेंस जारी करने को लेकर राजनीतिक दलों के नेताओं ने अलग-अलग सवाल उठाए हैं। सपा और कांग्रेस नेताओं ने कहा है कि लंबे समय से लंबित आम आवेदनों पर भी नियमानुसार निर्णय होना चाहिए। वहीं भाजपा नेताओं का कहना है कि संबंधित पदाधिकारियों ने पहले आवेदन किया था और लाइसेंस निर्धारित प्रक्रिया के तहत जारी हुए हैं।
प्रशासन का कहना है कि शस्त्र लाइसेंस नियमों के अनुसार ही जारी किए जाते हैं। वर्तमान जिलाधिकारी अनुनय झा के मुताबिक आचार संहिता लागू होने के कारण फिलहाल नए लाइसेंस जारी नहीं किए जा रहे हैं।
पूरे मामले में अहम बिंदु यह है कि किस आवेदक ने कब आवेदन किया, पुलिस सत्यापन कब हुआ, पात्रता क्या थी और लाइसेंस जारी करने का निर्णय किस तारीख को लिया गया। इन प्रशासनिक अभिलेखों से ही प्रक्रिया की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी।