काठमांडू। नेपाल सरकार ने नागरिकता संबंधी प्रक्रिया को नियंत्रित करने वाली नेपाल नागरिकता नियमावली, २०६३ में पांचवां संशोधन किया है। गृह मंत्रालय की ओर से जारी नेपाल राजपत्र के खंड ७६, काठमांडू, असोज १५, २०८३, संख्या ३८ में ‘नेपाल नागरिकता (पाँचौँ संशोधन) नियमावली, २०८३’ प्रकाशित की गई है। यह संशोधन नेपाल नागरिकता ऐन, २०६३ की धारा २३ के तहत बनाए जाने का उल्लेख राजपत्र में किया गया है।
राजपत्र में कहा गया है कि नेपाल नागरिकता नियमावली में संशोधन करना वांछनीय होने के कारण सरकार ने प्रदत्त अधिकारों का प्रयोग करते हुए नई नियमावली बनाई है। हालांकि राजपत्र में यह भी स्पष्ट किया गया है कि आधिकारिकता मुद्रण विभाग से प्रमाणित होने के बाद ही नियमावली लागू होगी।
नागरिकता संबंधी मौजूदा व्यवस्था में नेपाली नागरिकता के लिए अलग-अलग श्रेणियों और परिस्थितियों के अनुसार दस्तावेज तथा प्रक्रिया निर्धारित हैं। सामान्य तौर पर वंशज के आधार पर नागरिकता लेने वाले आवेदकों को संबंधित स्थानीय तह की सिफारिश, माता या पिता की नेपाली नागरिकता का प्रमाण, जन्मतिथि से संबंधित दस्तावेज तथा पहचान की पुष्टि जैसे कागजात प्रस्तुत करने पड़ते हैं। आवेदन पर अंतिम निर्णय जिला प्रशासन कार्यालय के अधिकृत अधिकारी स्तर पर होता है।
नेपाल में नागरिकता संबंधी व्यवस्था हाल के वर्षों में लगातार कानूनी बदलावों के दौर से गुजरी है। खासकर नेपाली मां के आधार पर नागरिकता, पिता की पहचान या पता न चलने की स्थिति, विवाह के आधार पर नागरिकता और दस्तावेजों में संशोधन जैसे विषय महत्वपूर्ण रहे हैं। ऐसे मामलों में स्थानीय स्तर की सिफारिश और जिला प्रशासन कार्यालय की जांच प्रक्रिया की भूमिका अहम रहती है।
नए संशोधन के बाद नागरिकता प्रमाणपत्र जारी करने और उससे जुड़ी प्रशासनिक प्रक्रिया में क्या-क्या बदलाव किए गए हैं, इसका वास्तविक आकलन राजपत्र में प्रकाशित संशोधित नियमों की पूरी धाराओं और अनुसूचियों के अध्ययन के बाद ही किया जा सकेगा। उपलब्ध अंश से यह स्पष्ट है कि सरकार ने नागरिकता नियमावली में पांचवें संशोधन को औपचारिक रूप से राजपत्रित किया है।
सीमा क्षेत्र में भी बढ़ेगी नजर: भारत-नेपाल सीमा से जुड़े जिलों में नागरिकता से संबंधित दस्तावेजों की जांच संवेदनशील विषय रही है। ऐसे में संशोधित नियमों में दस्तावेज सत्यापन, आवेदन प्रक्रिया और स्थानीय सिफारिश से जुड़े प्रावधानों में हुए बदलाव का असर सीमा क्षेत्र के प्रशासनिक कामकाज पर भी पड़ सकता है। हालांकि इसके वास्तविक प्रभाव का आकलन संशोधित नियमों की पूरी प्रति सामने आने के बाद ही किया जा सकेगा।