गोरखपुर। समाजवादी पार्टी ने गोरखपुर में बड़ा संगठनात्मक फैसला लेते हुए जिला और महानगर इकाई समेत सभी फ्रंटल संगठनों की कार्यकारिणियां तत्काल प्रभाव से भंग कर दी हैं। पार्टी के केंद्रीय कार्यालय से 4 अक्टूबर को जारी कार्यालय-ज्ञाप के अनुसार गोरखपुर के जिलाध्यक्ष सहित जिला कार्यकारिणी, महानगर अध्यक्ष सहित महानगर कार्यकारिणी तथा फ्रंटल संगठनों के सभी जिलाध्यक्ष, महानगर अध्यक्ष, पदाधिकारी और सदस्य तत्काल प्रभाव से भंग किए गए हैं।
आदेश का दायरा गोरखपुर से संबंधित सपा की राज्य कार्यकारिणी और फ्रंटल संगठनों की प्रदेश कार्यकारिणी तक भी है। इन कार्यकारिणियों के पदाधिकारियों और सदस्यों को भी तत्काल प्रभाव से पदमुक्त किया गया है। पार्टी के आदेश में इस संगठनात्मक फैसले का कोई विस्तृत कारण नहीं बताया गया है।
यह कार्रवाई ऐसे समय हुई है जब एक दिन पहले, 3 अक्टूबर को गोरखपुर प्रेस क्लब में सपा की पत्रकार वार्ता के दौरान पार्टी नेताओं के बीच बैठने की व्यवस्था को लेकर विवाद हुआ था। विवाद के बाद कहासुनी और हाथापाई की स्थिति बनने की खबरें सामने आई थीं।
घटना को लेकर आरोप-प्रत्यारोप भी सामने आए। पूर्व जिलाध्यक्ष नगीना साहनी ने अंशुमान सिंह के समर्थकों पर बदसलूकी और मारपीट का आरोप लगाया, जबकि अंशुमान सिंह ने विवाद को अपनी छवि खराब करने की कोशिश बताया। नगीना साहनी की ओर से कुछ लोगों के हथियार लेकर आने का भी आरोप लगाया गया, जिसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
विवाद के बाद पार्टी नेतृत्व ने अंशुमान सिंह के खिलाफ भी कार्रवाई की थी। इसके अगले दिन गोरखपुर की विभिन्न संगठनात्मक इकाइयों को व्यापक स्तर पर भंग करने का फैसला सामने आया। हालांकि, पार्टी के आधिकारिक कार्यालय-ज्ञाप में इस कार्रवाई को प्रेस वार्ता में हुए विवाद से जोड़कर कोई कारण दर्ज नहीं किया गया है।
संगठन की सभी प्रमुख इकाइयों के भंग होने के बाद अब गोरखपुर में सपा को जिला, महानगर और फ्रंटल संगठनों के लिए नए पदाधिकारियों की नियुक्ति करनी होगी।
गोरखपुर में सपा की जिला-महानगर इकाई समेत सभी कार्यकारिणियां भंग
जिलाध्यक्ष, महानगर अध्यक्ष और फ्रंटल संगठनों के पदाधिकारी भी हटे; एक दिन पहले प्रेस वार्ता में हुआ था विवाद
परमात्मा प्रसाद उपाध्याय
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