काठमांडू। नेपाली कांग्रेस के सभापति गगन थापा ने पार्टी के 15वें महाधिवेशन के लिए तैयार राजनीतिक प्रतिवेदन में कांग्रेस की पिछले दो दशकों की कार्यशैली पर गंभीर आत्मसमीक्षा की है। प्रतिवेदन में कहा गया है कि पार्टी अपने मूल राजनीतिक उद्देश्यों से हटकर पद और सत्ता को प्राथमिकता देने लगी। गठबंधन, भागबंटवारे, गुटबंदी और लेनदेन की राजनीति ने पार्टी के नैतिक आधार को कमजोर किया। भ्रष्टाचार और अनियमितता के मामलों में अपने पक्ष के लोगों को संरक्षण देने की प्रवृत्ति से सार्वजनिक संस्थाओं की स्वायत्तता प्रभावित होने की बात भी इसमें कही गई है।
थापा ने आगामी चुनावों में चुनाव पूर्व किसी दल के साथ गठबंधन नहीं करने का प्रस्ताव रखा है। कांग्रेस अपने चुनाव चिह्न, अपने उम्मीदवार और अपने एजेंडे के साथ जनता के बीच जाने की नीति अपनाएगी। उम्मीदवार चयन में गुट और पहुंच के बजाय योग्यता, योगदान तथा कार्य प्रदर्शन को प्राथमिकता देने और प्राइमरी चुनाव के जरिए उम्मीदवार चुनने का प्रस्ताव है।प्रतिवेदन में भदौ 23-24 के जनउभार को केवल षड्यंत्र बताकर खारिज करने के बजाय नागरिकों की सुशासन, अवसर और निष्पक्षता संबंधी मांगों को समझने की जरूरत बताई गई है। राज्य की ओर से बल प्रयोग, हिंसा और जनधन की क्षति की निष्पक्ष जांच तथा दोषियों पर कानूनी कार्रवाई की बात भी कही गई है।

फागुन 21 के चुनाव में कांग्रेस की पराजय को जनता से बढ़ती दूरी और राजनीतिक कमजोरियों का परिणाम बताते हुए संसद में जिम्मेदार विपक्ष की भूमिका निभाने का प्रस्ताव है। सरकार के कामकाज की निगरानी के लिए संघ और प्रदेश स्तर पर ‘छाया सरकार’ की अवधारणा भी प्रतिवेदन में रखी गई है।
‘समुन्नत नेपाल, सम्मानित नेपाली’ का खाकाथापा के प्रतिवेदन में पार्टी की आर्थिक दिशा को उत्पादन, रोजगार और निजी क्षेत्र के साथ साझेदारी से जोड़ने की बात है। शिक्षा, स्वास्थ्य, कौशल, कृषि, उद्योग, जलविद्युत, पर्यटन और डिजिटल तकनीक को विकास के प्रमुख आधार बनाने का प्रस्ताव है। निजी क्षेत्र को केवल करदाता के रूप में नहीं, बल्कि उत्पादन, निवेश और रोजगार सृजन के साझेदार के रूप में देखने की बात कही गई है।
साथ ही विकास परियोजनाओं, बजट खर्च और जिम्मेदार अधिकारियों की जानकारी नागरिकों को उपलब्ध कराने के लिए डिजिटल डैशबोर्ड बनाने का प्रस्ताव है। युवा सहभागिता बढ़ाने, संगठन को चुनावों तक सीमित न रखने और विभिन्न पीढ़ियों के बीच नेतृत्व की निरंतरता विकसित करने पर भी जोर दिया गया है।प्रतिवेदन में प्रधानमंत्री को दो कार्यकाल तक सीमित करने की संवैधानिक पहल, पार्टी में भ्रष्टाचार की शिकायतों की जांच के लिए स्वतंत्र आंतरिक ओम्बुड्समैन तथा शहीद, घायल और विस्थापित कार्यकर्ताओं के लिए 10 करोड़ रुपये के अक्षय कोष की स्थापना का प्रस्ताव भी शामिल है।
कुल मिलाकर थापा का प्रस्तावित दस्तावेज कांग्रेस को केवल नेतृत्व परिवर्तन के बजाय राजनीतिक संस्कृति, संगठन, अर्थव्यवस्था और नागरिकों से रिश्ते के स्तर पर पुनर्गठित करने की दिशा प्रस्तुत करता है। इसकी अंतिम रूपरेखा और प्रस्तावों पर निर्णय महाधिवेशन में होगा।