नई दिल्ली। रूस-यूक्रेन युद्ध को समाप्त कराने के प्रयासों में भारत की भूमिका को लेकर विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा है कि नई दिल्ली अब केवल शांति की वकालत करने तक सीमित नहीं है, बल्कि रूस और यूक्रेन दोनों के साथ बातचीत कर रही है। उन्होंने कहा कि भारत पिछले कुछ महीनों में इस प्रयास में “थोड़ा अधिक शामिल” हुआ है।
जयशंकर ने कहा कि भारत का रुख स्पष्ट है कि रूस-यूक्रेन संघर्ष समाप्त होना चाहिए और इसके लिए संवाद, कूटनीति तथा बातचीत जरूरी है। उनके अनुसार, भारत दोनों पक्षों के साथ बातचीत कर रहा है और इस दिशा में मददगार बनने की कोशिश कर रहा है।
उन्होंने जिन मुद्दों का उल्लेख किया, उनमें काला सागर में जहाजरानी की सुरक्षा, अनाज निर्यात, ऊर्जा निर्यात और “हमले न करने की संभावनाएं” शामिल हैं। जयशंकर के अनुसार, इन मुद्दों पर बातचीत अभी जारी है।
The Indian Express की रिपोर्ट के अनुसार, जयशंकर ने यह टिप्पणी 4 अक्टूबर को नई दिल्ली में हुई Munich Leaders’ Meeting के दौरान की। रिपोर्ट में उनके हवाले से कहा गया कि भारत संघर्ष को समाप्त करने के लिए दोनों देशों के संपर्क में है और “वकालत से आगे” बढ़कर अधिक सक्रिय भूमिका निभा रहा है।
Times of India की रिपोर्ट में भी जयशंकर के बयान को भारत की बढ़ी हुई भागीदारी के रूप में प्रस्तुत किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने कहा कि भारत रूस और यूक्रेन दोनों से बातचीत कर रहा है और तत्काल चिंताओं से जुड़े मुद्दों पर मददगार बनने की कोशिश कर रहा है।
TOI ने यूक्रेन के विदेश मंत्री एंड्री सिबिहा के एक अलग बयान का भी उल्लेख किया है। रिपोर्ट के अनुसार, सिबिहा ने कहा कि यूक्रेन को चार अलग-अलग अंतरराष्ट्रीय प्रस्ताव मिले हैं और भारत का प्रस्ताव उनमें सबसे व्यापक है। यह एक यूक्रेनी पक्ष का दावा है, जिसे स्वतंत्र रूप से इन दोनों स्रोतों में सत्यापित नहीं किया गया है।
भारतीय विदेश मंत्री के बयान से इतना स्पष्ट है कि भारत रूस और यूक्रेन दोनों के साथ संपर्क बनाए हुए है और युद्ध समाप्त कराने के लिए संवाद तथा कूटनीति को आवश्यक मानता है। हालांकि, उपलब्ध दोनों स्रोतों में भारत की बातचीत के किसी अंतिम समझौते, युद्धविराम या शांति समझौते की घोषणा नहीं है। इसलिए भारत की भूमिका को लेकर उपलब्ध जानकारी को जारी राजनयिक प्रयासों के रूप में ही देखा जा सकता है।
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