नई दिल्ली/चंडीगढ़। पंजाब कांग्रेस में लंबे समय से चल रहे नेतृत्व विवाद के बीच पार्टी ने अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग की जगह परगट सिंह को प्रदेश कांग्रेस कमेटी का अध्यक्ष बनाया है। वड़िंग ने 30 सितंबर को प्रदेश अध्यक्ष पद से इस्तीफा दिया था। इसके बाद उन्होंने राहुल गांधी से मुलाकात की। वहीं, 5 अक्टूबर को द इंडियन एक्सप्रेस को दिए इंटरव्यू में नए प्रदेश अध्यक्ष परगट सिंह ने पार्टी में गुटबाजी की धारणा को खारिज करते हुए संगठन को एकजुट बताया।
राजा वड़िंग अप्रैल 2022 से पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष थे। उनके कार्यकाल के अंतिम महीनों में पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के खेमे के साथ मतभेद सार्वजनिक रहे। एनडीटीवी के अनुसार, वड़िंग ने राहुल गांधी से मुलाकात के बाद कहा कि “चन्नी साहब जीत गए”। उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी के पंजाब प्रभारी सचिन पायलट चाहते थे कि वह पद छोड़ें, हालांकि वड़िंग के अनुसार उनसे किसी ने औपचारिक रूप से इस्तीफा देने को नहीं कहा था।
द टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, वड़िंग ने कहा कि उन्होंने परिस्थितियों को समझते हुए पद छोड़ने का फैसला किया। रिपोर्ट में उनके हवाले से यह भी कहा गया कि उन्हें लगा कि पायलट ने पार्टी को नया फीडबैक दिया हो सकता है। हालांकि, वड़िंग ने पायलट की भूमिका के बारे में कोई ठोस प्रमाण होने से इनकार किया था।
वड़िंग के बाद पार्टी ने जालंधर कैंट से तीन बार के विधायक और पूर्व भारतीय हॉकी कप्तान परगट सिंह को पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष बनाया। इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, परगट सिंह 62 वर्ष के हैं और फरवरी 2027 में होने वाले विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए संगठन की रणनीति पर काम करने की बात कर रहे हैं।
परगट सिंह ने पार्टी में गुटबाजी की धारणा को खारिज किया। उन्होंने कहा कि मतभेद लोकतंत्र और राजनीतिक दलों में होने चाहिए, लेकिन संगठन का लक्ष्य बड़ा है और कांग्रेस के सामने विधानसभा चुनाव जीतने का एक लक्ष्य है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस कार्यकर्ताओं की पंजाब और कांग्रेस के बाहर अपनी कोई “वजूद” या “औकात” नहीं है और पार्टी में हर व्यक्ति को अपनी बात रखने का अधिकार है।
उन्होंने संगठन में सभी नेताओं को उनकी क्षमता के अनुसार भूमिका देने और साथ लेकर चलने की बात कही। मुख्यमंत्री पद के चेहरे के सवाल पर परगट सिंह ने कहा कि इसका फैसला विधायक करेंगे और उससे पहले चुनाव जीतना प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि उम्मीदवारों का चयन योग्यता, सर्वेक्षण, जीतने की क्षमता और चरित्र के आधार पर होना चाहिए।
2027 के चुनाव के लिए परगट सिंह ने “ब्रांड पंजाब” को कांग्रेस के राजनीतिक फोकस का हिस्सा बताया। उनके अनुसार कानून-व्यवस्था, नशा, अर्थव्यवस्था, पंजाब का बढ़ता कर्ज, खेती और महिलाओं की सुरक्षा जैसे राज्य से जुड़े मुद्दे इसमें शामिल होंगे। उन्होंने कहा कि कांग्रेस भाजपा और आम आदमी पार्टी से जवाबदेही के मुद्दे भी उठाएगी।
हालांकि, टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट में राजनीतिक विश्लेषक सुगाता श्रीनिवासराजू ने नेतृत्व परिवर्तन को लेकर सवाल उठाए हैं। उनके अनुसार, वड़िंग के हटने और चन्नी को प्रदेश अध्यक्ष नहीं बनाए जाने से विवाद समाप्त होने के बजाय नई राजनीतिक स्थिति बन सकती है।
तीनों स्रोतों से स्पष्ट है कि पंजाब कांग्रेस ने प्रदेश अध्यक्ष बदल दिया है, लेकिन नए नेतृत्व के सामने पार्टी के भीतर एकता बनाए रखने और 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारी करने की चुनौती है। परगट सिंह ने एकजुट संगठन और “ब्रांड पंजाब” को प्राथमिकता बताया है, जबकि वड़िंग के बयान और TOI में प्रकाशित विश्लेषण से नेतृत्व परिवर्तन के राजनीतिक प्रभाव को लेकर अलग-अलग दृष्टिकोण सामने आते हैं।
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