चेन्नई। तमिलनाडु के मदुरांतकम और धारापुरम विधानसभा क्षेत्रों में 6 अक्टूबर को होने वाले उपचुनाव को लेकर मुख्यमंत्री और तमिलगा वेत्री कझगम (TVK) प्रमुख सी. जोसेफ विजय ने व्यापक प्रचार अभियान चलाया है। द इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, विजय ने दो सीटों के लिए चार दिन प्रचार किया—दो दिन जनसभाओं और दो दिन रोड शो में लगाए। मदुरांतकम में उन्होंने 30 से अधिक गांवों से होकर करीब 45 किलोमीटर का रोड शो भी किया।

यह प्रचार इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि अप्रैल में हुए विधानसभा चुनाव में सत्ता हासिल करने के दौरान विजय की व्यक्तिगत चुनावी मौजूदगी तुलनात्मक रूप से सीमित रही थी। कई निर्धारित रैलियां रद्द हुई थीं और TVK का काफी क्षेत्रीय प्रचार उम्मीदवारों तथा दूसरे नेताओं ने संभाला था। अब सत्ता में आने के बाद दो विधानसभा सीटों के उपचुनाव में विजय का व्यक्तिगत रूप से सक्रिय होना इन मुकाबलों के महत्व को बढ़ाता है।

दोनों सीटें उन AIADMK विधायकों के इस्तीफे के बाद खाली हुईं, जिन्होंने चुनाव जीतने के कुछ ही सप्ताह बाद विजय की पार्टी TVK का रुख किया। मदुरांतकम से मरगाथम कुमारवेल और धारापुरम से पी. सत्यबामा अब TVK के उम्मीदवार के रूप में फिर चुनाव मैदान में हैं। इन चुनावों का एक अहम पहलू यह है कि मतदाता उन्हीं नेताओं को दोबारा चुनने पर फैसला करेंगे, लेकिन इस बार वे अलग पार्टी के उम्मीदवार हैं। 

मदुरांतकम और धारापुरम में जीत को TVK के लिए इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि पार्टी अप्रैल के विधानसभा चुनाव के बाद कमजोर AIADMK से नेताओं और स्थानीय पदाधिकारियों को अपने साथ जोड़ रही है। विपक्ष ने भी उपचुनाव को अलग तरीके से पेश किया है। AIADMK ने सत्यबामा के पार्टी बदलने को अपने प्रचार का मुद्दा बनाया है। रिपोर्ट के अनुसार, AIADMK समर्थक उन्हें “traitor” कहकर निशाना बना रहे हैं और सवाल उठा रहे हैं कि अप्रैल में AIADMK के टिकट पर चुने गए विधायक को कुछ महीनों बाद दूसरी पार्टी के टिकट पर क्यों चुना जाए।

DMK प्रमुख एम.के. स्टालिन ने भी उपचुनाव को लेकर TVK पर हमला किया और इसे “death of democracy” बताया।DMK के लिए मुकाबला इसलिए अलग है क्योंकि इस बार वह विधानसभा चुनाव के दौरान मौजूद व्यापक गठबंधन के बिना चुनाव लड़ रही है। कांग्रेस, VCK, MDMK और IUML विजय के राजनीतिक खेमे की ओर चले गए हैं, जबकि CPI और CPI(M) अलग-अलग चुनाव लड़ रहे हैं। AIADMK के लिए भी ये दोनों सीटें महत्वपूर्ण हैं क्योंकि दोनों उसके मौजूदा विधायकों के पार्टी छोड़ने के बाद खाली हुईं। 

चुनाव प्रचार के दौरान TVK पर वोट के बदले नकदी बांटने के आरोप भी लगाए गए। विधानसभा में विपक्ष के नेता उदयनिधि स्टालिन ने धारापुरम में TVK पर नकदी बांटने का आरोप लगाया। CPI(M) के राज्य सचिव पी. शनमुगम ने भी ग्रामीणों के हवाले से कई दलों द्वारा पैसे बांटने की बात कही और TVK पर सबसे अधिक भुगतान करने का आरोप लगाया। TVK ने इन आरोपों को स्पष्ट रूप से खारिज किया और कहा कि वह नकदी के बदले वोट की राजनीति का विरोध करती है।

CPI और CPI(M) का अलग चुनाव लड़ना भी इस मुकाबले को बहुकोणीय बनाता है। दोनों दल विजय सरकार को बाहर से समर्थन देते रहे हैं, लेकिन इस बार TVK उम्मीदवारों के खिलाफ चुनाव लड़ रहे हैं। PMK ने फिलहाल तटस्थ रुख रखा है। हालाँकि दो विधानसभा उपचुनावों को पूरे तमिलनाडु के राजनीतिक रुझान का सीधा पैमाना मानना उचित नहीं होगा। स्थानीय उम्मीदवार, संगठन, मतदान प्रतिशत और सत्ता में होने का लाभ जैसे कारक परिणाम को प्रभावित कर सकते हैं।

इस लिहाज से 6 अक्टूबर के ये दो उपचुनाव TVK, DMK और AIADMK—तीनों के लिए अलग-अलग राजनीतिक सवाल लेकर आए हैं। लेकिन अंतिम निष्कर्ष मतगणना के बाद ही निकलेगा।