सिद्धार्थनगर, 5 अक्टूबर। फसल अवशेष यानी पराली जलाने की घटनाओं पर रोक लगाने के लिए जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। जिलाधिकारी शिवशरणप्पा जीएन ने निर्देश दिया कि जिले में बिना फसल अवशेष प्रबंधन उपकरण के कोई भी कंबाइन हार्वेस्टर संचालित नहीं होने दिया जाए। ऐसी कंबाइन पकड़े जाने पर उसे तत्काल सीज करने की कार्रवाई की जाएगी।
कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित बैठक में जिलाधिकारी ने कहा कि फसल कटाई के दौरान कंबाइन हार्वेस्टर के साथ सुपर स्ट्रॉ मैनेजमेंट सिस्टम, स्ट्रॉ रीपर, स्ट्रॉ रेक एवं बेलर अथवा अन्य उपयुक्त फसल अवशेष प्रबंधन यंत्र का प्रयोग अनिवार्य रूप से किया जाए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि इस व्यवस्था के बिना चलने वाली कंबाइन पर तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
डीएम ने कहा कि यदि कोई कंबाइन हार्वेस्टर बिना आवश्यक उपकरणों के चलता पाया जाता है तो उसे सीज कर दिया जाएगा। कंबाइन मालिक को अपने खर्च पर सुपर स्ट्रॉ मैनेजमेंट सिस्टम अथवा निर्धारित फसल अवशेष प्रबंधन व्यवस्था लगाने के बाद ही मशीन छोड़ी जाएगी।
बैठक में किसानों को पराली जलाने से मिट्टी की उर्वरता, पर्यावरण, जलवायु और मानव स्वास्थ्य पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों की जानकारी देने पर भी जोर दिया गया। अधिकारियों ने बताया कि राष्ट्रीय हरित अधिकरण के आदेश के तहत फसल अवशेष जलाना दंडनीय है।केंद्र सरकार के निर्देशों के अनुसार पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति के तौर पर दो एकड़ से कम भूमि वाले किसान से प्रति घटना 5,000 रुपये, दो से पांच एकड़ तक 10,000 रुपये और पांच एकड़ से अधिक भूमि वाले किसान से प्रति घटना 30,000 रुपये की वसूली का प्रावधान बताया गया।
प्रशासन ने किसानों से अपील की कि कटाई के बाद खेत में पराली न जलाएं। जिले में संचालित कस्टम हायरिंग सेंटरों के माध्यम से फसल अवशेष एकत्र कर जैविक खाद बनाने अथवा उसे धुरियापार, गोरखपुर स्थित सीबीजी प्लांट को बेचकर अतिरिक्त आय अर्जित करने का विकल्प अपनाएं।
बैठक में उप कृषि निदेशक राजेश कुमार, जिला कृषि अधिकारी रविशंकर पाण्डेय, सीबीजी प्लांट के प्रतिनिधि, कंबाइन धारक और ग्राम प्रधान मौजूद रहे।
पराली जलाई तो सीज होगा कंबाइन हार्वेस्टर, किसान पर भी लगेगा जुर्माना
सिद्धार्थनगर डीएम का सख्त निर्देश, फसल अवशेष जलाने की घटनाएं शून्य करने का लक्ष्य
परमात्मा प्रसाद उपाध्याय
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