बढ़नी/सिद्धार्थनगर। ठेबरुआ थाना क्षेत्र के गुलरी गांव में एक दर्दनाक हादसे ने एक परिवार की पूरी दुनिया उजाड़ दी। मेहनत-मजदूरी कर पत्नी और चार बच्चों का भरण-पोषण करने वाले औवैदुल्ला पुत्र हैदर की ट्रेन की चपेट में आने से मौत हो गई। पिता की अचानक मौत से चार मासूम बच्चों के सिर से पिता का साया उठ गया। परिवार के सामने अब रोजी-रोटी और बच्चों के भविष्य की चिंता खड़ी हो गई है।
जानकारी के मुताबिक गुलरी गांव निवासी औवैदुल्ला परिवार के एकमात्र कमाने वाले सदस्य थे। वह मजदूरी कर जो कुछ कमाते थे, उसी से घर का खर्च चलता था। सोमवार को वह शौच के लिए रेलवे लाइन के पास गए थे। इसी दौरान अचानक वह ट्रेन की चपेट में आ गए। हादसा इतना भयावह था कि उनकी मौके पर ही मौत हो गई।
घटना की जानकारी मिलते ही आसपास के लोगों की भीड़ जुट गई। ग्रामीणों ने मामले की सूचना ठेबरुआ पुलिस को दी। सूचना पाकर पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर आवश्यक कार्रवाई शुरू की। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।
पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी होने के बाद शव देर रात गांव पहुंचा। शव देखते ही परिजनों में कोहराम मच गया। पत्नी और बच्चों का रो-रोकर बुरा हाल था। जिस पिता के सहारे बच्चों की जिंदगी आगे बढ़ रही थी, वह अचानक हमेशा के लिए उनसे दूर हो गया। देर रात गमगीन माहौल में शव को सुपुर्द-ए-खाक कर दिया गया।
औवैदुल्ला की मौत केवल एक व्यक्ति की मौत नहीं, बल्कि पूरे परिवार के सामने खड़े हुए बड़े संकट की कहानी है। परिवार की आर्थिक स्थिति उनके मेहनत-मजदूरी पर निर्भर थी। उनकी मौत के बाद चार बच्चों की पढ़ाई, भोजन और दूसरी जरूरतों को पूरा करने की जिम्मेदारी अब परिवार के लिए बड़ी चुनौती बन गई है।
हादसे की खबर से पूरे गांव में मातम का माहौल है। ग्रामीणों ने प्रशासन से पीड़ित परिवार की आर्थिक स्थिति को देखते हुए हरसंभव सहायता उपलब्ध कराने की मांग की है, ताकि अचानक परिवार के मुखिया को खो चुके बच्चों और उनके परिवार को मुश्किल समय में कुछ सहारा मिल सके।
ट्रेन की चपेट में आया परिवार का सहारा, चार बच्चों के सिर से उठा पिता का साया
शौच के लिए रेलवे लाइन के पास गया था मजदूर, अचानक मौत से परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़; चार बच्चों के सामने रोजी-रोटी का संकट
परमात्मा प्रसाद उपाध्याय
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