डिब्रूगढ़। केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने 5 अक्टूबर 2026 को डिब्रूगढ़ के बोगीबील टर्मिनल से 540 मीट्रिक टन मेथनॉल की खेप लेकर जा रहे जहाज को बांग्लादेश के लिए रवाना किया। असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा कार्यक्रम में वर्चुअली शामिल हुए। PIB के अनुसार, यह 1947 के बाद लगभग 70 वर्षों में ऊपरी असम से किसी विदेशी बंदरगाह के लिए भेजी गई पहली माल खेप है। मेथनॉल असम पेट्रो-केमिकल्स लिमिटेड (APCL), नामरूप में उत्पादित किया गया है और इसे बांग्लादेश के ढाका स्थित पांगांव बंदरगाह तक पहुंचाया जाएगा।
जहाज ब्रह्मपुत्र यानी राष्ट्रीय जलमार्ग-2 से भारत-बांग्लादेश सीमा तक करीब 768 किलोमीटर की दूरी तय करेगा। इसके बाद यह भारत-बांग्लादेश प्रोटोकॉल मार्ग (IBPR) से आगे बढ़ेगा। डिब्रूगढ़ के बोगीबील से ढाका के नारायणगंज तक कुल यात्रा लगभग 1,300 किलोमीटर की होगी।
सरकार इस यात्रा को यह परखने के लिए एक परीक्षण के रूप में देख रही है कि क्या ब्रह्मपुत्र पूर्वोत्तर भारत को विदेशी बाजारों से जोड़ने वाला व्यावसायिक रूप से व्यवहार्य माल ढुलाई गलियारा बन सकता है। PIB के अनुसार, बांग्लादेश को मेथनॉल की नियमित खेप भेजने की योजना है।
सोनोवाल ने इसे डिब्रूगढ़ के नदी परिवहन इतिहास से जोड़ते हुए कहा कि दशकों बाद शहर से फिर जहाज विदेशी बाजार के लिए रवाना हुआ है। उन्होंने इसे एक शुरुआत बताया।मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि नामरूप में बना असम का उत्पाद अब असम की नदी के रास्ते अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंच रहा है।
डिब्रूगढ़ कभी पूर्वी भारत के प्रमुख नदी बंदरगाहों में शामिल था। 1954 में डिब्रूगढ़ घाट से नियमित बुकिंग बंद हुई और 15 अक्टूबर 1956 को घाट बंद कर दिया गया। 1972 में भारत और बांग्लादेश ने नदी व्यापार प्रोटोकॉल पर हस्ताक्षर किए। 1988 में सदिया से धुबरी तक ब्रह्मपुत्र के 891 किलोमीटर हिस्से को राष्ट्रीय जलमार्ग-2 घोषित किया गया।
हाल के वर्षों में इस मार्ग पर गतिविधियां बढ़ी हैं। बोगीबील यात्री एवं मालवाहक टर्मिनल फरवरी 2024 में खोला गया। दिसंबर 2024 में ‘जलवाहक’ माल प्रोत्साहन कार्यक्रम शुरू हुआ।
पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय के अनुसार, राष्ट्रीय जलमार्गों पर माल ढुलाई 2013-14 के 18 मिलियन मीट्रिक टन से बढ़कर 2025-26 में 218 मिलियन मीट्रिक टन हो गई।
टिप्पणियां
टिप्पणी करने के लिए रीडर लॉगिन करें।