काठमांडू। नेपाली कांग्रेस में नवसृजित वरिष्ठ उपसभापति पद पर विश्वप्रकाश शर्मा निर्विरोध निर्वाचित हुए हैं। मंगलवार को केंद्रीय कार्यसमिति के विभिन्न पदों के लिए हुए मनोनयन में इस पद पर शर्मा के अलावा किसी अन्य नेता ने उम्मीदवार के रूप में नामांकन नहीं किया।

वरिष्ठ उपसभापति की नई जिम्मेदारी के साथ शर्मा के सामने कांग्रेस को संगठनात्मक रूप से मजबूत करने और उसकी खोई राजनीतिक जमीन वापस हासिल करने की चुनौती है। पिछले फागुन में हुए प्रतिनिधिसभा चुनाव में कांग्रेस ३७ सीटों के साथ दूसरे स्थान पर रही थी, जबकि २०७९ के चुनाव में वह सबसे बड़ी पार्टी बनी थी।

दिसंबर २०२५ में हुए विशेष महाधिवेशन से शर्मा उपसभापति बने थे। इसी महाधिवेशन से गगन थापा सभापति निर्वाचित हुए। शर्मा और थापा की पहल पर विशेष महाधिवेशन कराया गया था। दोनों नेता विद्यार्थी राजनीति से कांग्रेस की राष्ट्रीय राजनीति में पहुंचे और पार्टी में पुस्तान्तरण तथा आंतरिक सुधार के प्रमुख समर्थक माने जाते हैं।

२०७८ में हुए १४वें महाधिवेशन में शर्मा महामंत्री निर्वाचित हुए थे। उस समय वे प्रकाशमान सिंह के पैनल से महामंत्री पद के उम्मीदवार थे, जबकि गगन थापा शेखर कोइराला के पैनल से चुनाव लड़े थे। थापा महामंत्री निर्वाचित हुए थे। बाद में दोनों नेताओं ने पार्टी में बदलाव की मुहिम को आगे बढ़ाया।१४वें महाधिवेशन में शर्मा और थापा के पैनल का नेतृत्व करने वाले प्रकाशमान सिंह और शेखर कोइराला दिसंबर २०२५ के विशेष महाधिवेशन में शामिल नहीं हुए। सिंह अब पूर्वसभापति शेरबहादुर देउवा के समूह के साथ समानांतर महाधिवेशन की तैयारी में हैं, जबकि कोइराला तटस्थ हैं।

झापा निवासी शर्मा ने २०४१ में नेविसंघ की विद्यालय इकाई के अध्यक्ष के रूप में राजनीतिक यात्रा शुरू की। वे जिला अध्यक्ष, केंद्रीय सदस्य और महामंत्री की जिम्मेदारी संभालते हुए २०५७ में नेविसंघ के केंद्रीय अध्यक्ष बने। उनके अध्यक्ष रहते गगन थापा संगठन के उपाध्यक्ष थे। १३वें महाधिवेशन के बाद तत्कालीन सभापति शेरबहादुर देउवा ने उन्हें पार्टी का प्रवक्ता बनाया था।

संसदीय राजनीति में शर्मा २०७९ में पहली बार सांसद निर्वाचित हुए। वे झापा-१ से प्रतिनिधिसभा पहुंचे थे। इससे पहले २०७० और २०७४ में इसी क्षेत्र से चुनाव हार चुके थे। फरवरी २०२६ के चुनाव में उन्होंने उम्मीदवार नहीं बने। वे अब तक मंत्री भी नहीं रहे हैं।तर्कपूर्ण और शालीन भाषण के लिए पहचाने जाने वाले शर्मा राजनीतिक मुद्दों को साहित्यिक और लयात्मक शैली में प्रस्तुत करने के लिए भी चर्चित हैं। कविता और गीत लेखन में उनकी रुचि रही है।

अब वरिष्ठ उपसभापति के रूप में उनकी सबसे बड़ी परीक्षा कांग्रेस के भीतर किए गए सुधार और पुस्तान्तरण के दावों को संगठनात्मक मजबूती और चुनावी प्रदर्शन में बदलने की होंगी