फ्रांस में स्कूलों से जुड़े मुद्दों को लेकर मंगलवार को देशभर में बड़े प्रदर्शन हुए। पेरिस और अन्य शहरों में पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए आंसू गैस का इस्तेमाल किया। एसोसिएटेड प्रेस की 6 अक्टूबर की रिपोर्ट के अनुसार, प्रदर्शनकारी स्कूलों के लिए अधिक शिक्षा फंडिंग की मांग कर रहे थे।
प्रदर्शन का असर राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की प्रशासनिक सरकार पर बढ़ते दबाव के रूप में सामने आया। प्रदर्शनों में छात्रों और अन्य प्रदर्शनकारियों ने स्कूलों में भीड़भाड़ वाली कक्षाओं, शिक्षकों की कमी और जर्जर स्कूलों सहित शिक्षा व्यवस्था से जुड़ी चिंताओं को उठाया। पेरिस क्षेत्र के एक हाई स्कूल में सितंबर के मध्य में शुरू हुए विरोध धीरे-धीरे देशव्यापी आंदोलन में बदल गए। मार्सेई, स्ट्रासबर्ग और अन्य शहरों में भी बड़ी संख्या में लोग झंडों और पोस्टरों के साथ सड़कों पर उतरे।
फ्रांस के गृह मंत्रालय के अनुमान के अनुसार, मंगलवार को देशभर में 2.5 लाख लोगों ने प्रदर्शनों में हिस्सा लिया। इनमें 56,000 लोग पेरिस में थे।
पेरिस में प्रदर्शन के दौरान छोटे समूहों की दंगा-रोधी पुलिस के साथ झड़प भी हुई। रिपोर्ट के अनुसार, यह घटना शहर के एक चौराहे पर उस समय हुई जब एक बड़े समूह ने शांतिपूर्ण मार्च किया। पुलिस द्वारा गिरफ्तारियों, आंसू गैस और दंगा-नियंत्रण हथियारों के इस्तेमाल ने कुछ अभिभावकों और शिक्षकों में नाराजगी बढ़ाई।
उत्तरी शहर लिली की प्रदर्शनकारी लीआ मोनिमार्ट ने कहा, “हमें उनकी बात सुनने की जरूरत है।” उन्होंने प्रदर्शन में शामिल छात्रों के बारे में कहा कि वे 17 साल के हैं, लेकिन उन्हें पता है कि वे किस बारे में बात कर रहे हैं और यह महत्वपूर्ण है कि उन्हें समर्थन देने वाले वयस्क भी मौजूद हों।
फ्रांस के गृह मंत्री लॉरेंट नुनेज़ ने कहा कि पुलिस की प्रतिक्रिया “लगभग सभी मामलों” में अनुपातिक रही और कुछ मौकों पर प्रदर्शन दंगों में बदल गए, जिसके कारण पुलिस हस्तक्षेप जरूरी हुआ।
प्रधानमंत्री सेबास्तियन लेकोर्नू ने कहा कि सरकार और स्कूल नेतृत्व को छात्रों की चिंताओं को सुनना और समाधान तलाशना चाहिए। संसद में प्रदर्शन आंदोलन पर सवालों के जवाब में उन्होंने स्कूलों को प्रभावित करने वाली “अल्ट्रा वायलेंस” की निंदा की। पुलिस की रणनीति पर सवाल उठने के बीच उन्होंने कहा कि किसी भी “दुर्घटना” की जांच की जाएगी और पुलिस के नस्लवादी होने के आरोपों को “झूठ” बताया।
रिपोर्ट के अनुसार, दो सप्ताह से अधिक समय से चल रहे कक्षा बहिष्कार, स्कूल ब्लॉकेड और पुलिस कार्रवाई के दौरान 6,100 से अधिक गिरफ्तारियां हो चुकी हैं। रिपोर्ट कहती है कि इनमें अधिकतर नाबालिग हैं। फर्स्ट क्लिप इन गिरफ्तारियों का विस्तृत डेटा या स्वतंत्र सत्यापन उपलब्ध नहीं कराता।
फ्रांस में स्कूल विरोध प्रदर्शनों में 2.5 लाख से अधिक लोग जुटे, पुलिस ने आंसू गैस छोड़ी
पेरिस समेत फ्रांस के कई शहरों में छात्रों की शिक्षा फंडिंग, भीड़भाड़ वाली कक्षाओं, शिक्षकों की कमी और जर्जर स्कूलों को लेकर प्रदर्शन हुए। गृह मंत्रालय के अनुसार मंगलवार को देशभर में लगभग 2.5 लाख लोगों ने प्रदर्शनों में हिस्सा लिया, जिनमें 56,000 पेरिस में थे।
Firstclip desk (सोर्स:IE)
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