बेंगलुरु। विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) ने चेतावनी दी है कि मौजूदा अल नीनो आने वाले महीनों में और मजबूत हो सकता है तथा दिसंबर में इसके चरम पर पहुंचने की संभावना है। रिपोर्ट के अनुसार, संयुक्त राष्ट्र की इस मौसम संबंधी संस्था ने फरवरी 2027 तक अल नीनो बने रहने की लगभग 100 प्रतिशत संभावना जताई है।


अल नीनो प्रशांत महासागर के पानी के असामान्य रूप से गर्म होने से जुड़ा जलवायु पैटर्न है, जो दुनिया भर के मौसम को प्रभावित कर सकता है।स्पेनिश भाषा में 'एल नीनो' का मतलब 'छोटा लड़का' या 'ईसा मसीह का बच्चा' होता है, क्योंकि यह गर्म जलधारा अक्सर क्रिसमस के आसपास दिखाई देती है। इसमें भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर की सतह का तापमान सामान्य से काफी बढ़ जाता है और पूर्वी व्यापारिक पवनें (Trade Winds) कमजोर हो जाती हैं।


अल नीनो के कारण भारत में मानसून कमजोर पड़ सकता है, जिससे कई बार बारिश कम होती है और सूखे जैसी स्थिति पैदा हो जाती है।WMO के अनुसार, इसके मजबूत होने से आने वाले महीनों में दुनिया के बड़े हिस्सों में औसत से अधिक तापमान दर्ज किए जाने की आशंका है।


अल नीनो का असर पहले से ही कुछ क्षेत्रों में दिखाई दे रहा है। महाराष्ट्र और कर्नाटक में सूखे की स्थिति है, महाराष्ट्र ने अपने कई जिलों में 10 प्रतिशत पानी कटौती लागू की है। यूरोप में भी इस वर्ष गर्मियों के दौरान कई देशों में रिकॉर्ड तापमान का उल्लेख है। रिपोर्ट के अनुसार, अगस्त में नीनो 3.4 क्षेत्र का तापमान सामान्य से 2.5 डिग्री सेल्सियस अधिक था। यह क्षेत्र अल नीनो-दक्षिणी दोलन (ENSO) की स्थिति के आकलन में महत्वपूर्ण माना जाता है।अल नीनो भारत में वर्षा को कम कर सकता है, लेकिन इसका स्थानीय प्रभाव अलग-अलग हो सकता है। उपलब्ध रिपोर्ट भविष्य की आशंका बताती है; इसे निश्चित रूप से होने वाली मौसम घटना के रूप में नहीं पढ़ा जाना चाहिए।

स्रोत: The Indian Express, 9 अक्टूबर 2026,