मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को रद्द करने की मांग को लेकर शनिवार को दिल्ली समेत देश के कई शहरों में प्रदर्शन हुए। ‘द हिंदू’ ने पुलिस सूत्रों के हवाले से पांच हजार से अधिक प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने की खबर दी है। हालांकि, हिरासत में लिए गए लोगों की संख्या की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है और पुलिस की ओर से इस संबंध में विस्तृत आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।

प्रदर्शन को देखते हुए दिल्ली में शुक्रवार रात से सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई थी। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, 45 मेट्रो स्टेशन बंद किए गए और बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया। कुछ इलाकों में इंटरनेट सेवाएं बाधित किए जाने की भी खबर है। कड़ी सुरक्षा के बावजूद प्रदर्शन जारी रहेl


प्रदर्शन का नेतृत्व कर रही कक्रोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक अभिजीत दीपके को दिल्ली पहुंचने के दौरान हवाई अड्डे पर हिरासत में लिए जाने की खबर है। पार्टी से जुड़े सौरव दास, आशुतोष रांका और कानूनी प्रमुख रत्ना सिंह के भी हिरासत में लिए जाने की जानकारी दी गई है। 

राजनीतिक और विपक्षी नेताओं की सूची में दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन, सामाजिक-राजनीतिक कार्यकर्ता योगेंद्र यादव, भाकपा (माले) के महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य, वामपंथी नेता बृंदा करात और त्रिपुरा के पूर्व मुख्यमंत्री माणिक सरकार के नाम भी शामिल बताए गए हैं। 

छात्र और नागरिक समाज से जुड़े कार्यकर्ताओं में ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) की अध्यक्ष नेहा बोरा तथा अधिवक्ता और सामाजिक कार्यकर्ता प्रशांत भूषण के नाम भी सामने आए हैं।

भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा ने आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान हिंसा और आगजनी की साजिश थी। दूसरी ओर, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी ने पुलिस कार्रवाई की आलोचना की।

प्रदर्शनकारी मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं की जांच और निर्वाचन आयोग की जवाबदेही तय करने की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि मतदाता सूची में बदलाव की प्रक्रिया पारदर्शी और जवाबदेह होनी चाहिए।

निर्वाचन आयोग के अनुसार, एसआईआर का उद्देश्य मतदाता सूची को अद्यतन करना और उसमें मौजूद त्रुटियों को दूर करना है।