भारतीय राजनीति में बृजभूषण तिवारी का नाम उन नेताओं में लिया जाता है, जिन्होंने समाजवादी विचारधारा को अपने सार्वजनिक जीवन का आधार बनाया। उनके लिए राजनीति सत्ता का साधन भर नहीं, बल्कि सामाजिक समानता और वंचितों के अधिकारों की लड़ाई का माध्यम थी।
13 अक्टूबर 1941 को सिद्धार्थनगर जिले के जमुनी गांव में जन्मे बृजभूषण तिवारी ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से उच्च शिक्षा प्राप्त की। छात्र जीवन में ही वे समाजवादी आंदोलन से जुड़ गए और छात्र राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाई। डॉ. राममनोहर लोहिया के विचारों से प्रभावित होकर उन्होंने सामाजिक न्याय और समानता को अपने राजनीतिक चिंतन का आधार बनाया।
आपातकाल के दौरान उन्हें 19 महीने जेल में रहना पड़ा। वर्ष 1977 में वे पहली बार छठी लोकसभा के सदस्य निर्वाचित हुए। इसके बाद 1989 और 1996 में भी लोकसभा पहुंचे। खलीलाबाद और डुमरियागंज संसदीय क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करते हुए उन्होंने राष्ट्रीय राजनीति में अपनी पहचान बनाई।
वर्ष 2006 में बृजभूषण तिवारी राज्यसभा के सदस्य निर्वाचित हुए। वर्ष 2012 में वे दूसरी बार राज्यसभा के लिए चुने गए। समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता के रूप में वे संगठन और विचारधारा से जुड़े महत्वपूर्ण चेहरों में शामिल रहे। पिछड़े, दलित और वंचित वर्गों के अधिकारों की पैरवी उनकी राजनीति का प्रमुख पक्ष था।
25 अप्रैल 2012 को दिल्ली में उनका निधन हो गया। उनके निधन से समाजवादी आंदोलन ने एक अनुभवी नेता और विचारशील मार्गदर्शक खो दिया। उनका जीवन इस बात की याद दिलाता है कि राजनीति की सार्थकता केवल चुनावी जीत या संसदीय पदों में नहीं, बल्कि उन सिद्धांतों में भी होती है, जिनके लिए कोई व्यक्ति जीवनभर प्रतिबद्ध रहता है।
बृजभूषण तिवारी की राजनीतिक यात्रा समाजवादी विचारधारा के प्रति समर्पण और जनहित को प्राथमिकता देने वाली राजनीति का महत्वपूर्ण हैं
बृजभूषण तिवारी: समाजवादी विचारों का सफर
बृजभूषण तिवारी के लिए राजनीति सत्ता का साधन भर नहीं, बल्कि सामाजिक समानता और वंचितों के अधिकारों की लड़ाई का माध्यम थी।
परमात्मा प्रसाद उपाध्याय
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