प्रयागराज। उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव में देरी के मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने तीन महीने के भीतर चुनाव कराने का आदेश दिया है। कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि चुनाव प्रक्रिया पूरी होने तक निवर्तमान ग्राम प्रधान प्रशासक के रूप में काम करते रहेंगे। न्यायमूर्ति अजीत कुमार और न्यायमूर्ति गरिमा प्रसाद की खंडपीठ ने बुधवार को यह फैसला सुनाया।

ग्राम पंचायतों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद निवर्तमान प्रधानों को प्रशासक नियुक्त किए जाने और चुनाव में देरी को लेकर हाई कोर्ट में याचिकाएं दाखिल की गई थीं। अधिवक्ता इम्तियाज हुसैन, दशरथ यादव और अन्य की ओर से दाखिल याचिकाओं पर सुनवाई के बाद अदालत ने राज्य सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग को निर्धारित समय-सीमा के भीतर चुनाव प्रक्रिया पूरी कराने का निर्देश दिया।इस मामले में बुधवार को करीब तीन घंटे तक सुनवाई चली थी। सुनवाई पूरी होने के बाद अदालत ने फैसला सुरक्षित रख लिया था। बाद में खंडपीठ ने अपना निर्णय सुनाते हुए तीन महीने के भीतर पंचायत चुनाव कराने का आदेश दिया।

दरअसल, प्रदेश सरकार ने ग्राम पंचायतों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद 27 मई 2026 से निवर्तमान प्रधानों को अधिकतम छह महीने या नई पंचायतों के गठन तक प्रशासक की जिम्मेदारी देने की व्यवस्था की थी। इसके तहत जिलाधिकारियों को नियुक्ति का अधिकार दिया गया था।

प्रशासक के रूप में निवर्तमान प्रधानों के अधिकार सीमित रखे गए थे। उन्हें साफ-सफाई, पेयजल, स्ट्रीट लाइट और अन्य आवश्यक सेवाओं से जुड़े दैनिक कार्य जारी रखने की जिम्मेदारी दी गई थी। अब चुनाव की तारीखों की घोषणा और अन्य प्रक्रियाओं को समय पर पूरा करना राज्य सरकार तथा निर्वाचन आयोग के लिए अहम होगा