भारत और चीन के आर्थिक रिश्तों को दोबारा आगे बढ़ाने की संभावनाओं पर केंद्र सरकार ने अपने रुख के संकेत दिए हैं। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा है कि दोनों देशों के बीच संबंध विकसित करने की कोशिश जारी है, लेकिन अभी यह तय नहीं है कि आगे की राह किस दिशा में जाएगी।

नई दिल्ली में आयोजित ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम में गोयल से चीन के साथ संभावित संयुक्त उपक्रमों और कारोबारी सहयोग को लेकर सवाल किया गया। उन्होंने कहा कि भारत सभी देशों के साथ काम करने के लिए तैयार है, लेकिन इसके लिए समझौते की शर्तें उचित होनी चाहिए। उन्होंने निरंतर जुड़ाव और भू-राजनीतिक परिस्थितियों को भी महत्वपूर्ण बताया।

गोयल के बयान से संकेत मिलता है कि चीन के साथ आर्थिक सहयोग की संभावनाओं को पूरी तरह बंद नहीं किया गया है। हालांकि, उन्होंने किसी नए समझौते, निवेश योजना या वार्ता की समयसीमा का ऐलान नहीं किया। इसलिए उनके वक्तव्य को दोनों देशों के बीच किसी ठोस सहमति की पुष्टि के तौर पर नहीं देखा जा सकता।

व्यापार में बराबरी का सवाल

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने इसी मंच पर भारत-चीन आर्थिक संबंधों से जुड़ी दूसरी चुनौती पर ध्यान केंद्रित किया। उन्होंने दोनों देशों के बीच व्यापार संतुलन को चीन के पक्ष में झुका हुआ बताया। साथ ही, उन्होंने कहा कि जिन क्षेत्रों में भारतीय कंपनियों ने दूसरे बाजारों में अच्छा प्रदर्शन किया है, वहां उन्हें चीन में पर्याप्त कारोबारी अवसर नहीं मिले हैं।


जयशंकर के अनुसार, भारत ने चीनी कारोबार को जिस तरह अवसर दिए हैं, उसके मुकाबले भारतीय कारोबार को चीन में वैसी बाजार पहुंच नहीं मिली।


भारत-चीन संबंधों की पृष्ठभूमि में वास्तविक नियंत्रण रेखा पर सैन्य गतिरोध और उससे पैदा हुआ तनाव भी शामिल है। रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले दो वर्षों में संबंध सुधारने की कोशिशें हुई हैं। 


अमेरिका के साथ व्यापार वार्ता भी चर्चा में

गोयल ने भारत-अमेरिका संबंधों को केवल व्यापार तक सीमित नहीं बताया। उन्होंने रक्षा, प्रौद्योगिकी, महत्वपूर्ण खनिजों और लोगों के बीच संपर्क को भी द्विपक्षीय रिश्तों के अहम क्षेत्र बताया।


जयशंकर ने अमेरिका के साथ प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर बातचीत का उल्लेख करते हुए कहा कि वार्ता आगे बढ़ रही है, हालांकि कुछ मुद्दों पर चर्चा जारी है।