अमेरिकी गायिका मैरी मिलबेन और अभिजीत दिपके के बीच सोशल मीडिया X अकाउंट पर हुई बहस ने अमेरिकी दानदाताओं से कथित फंडिंग और भारत के आंतरिक मामलों में विदेशी हस्तक्षेप का संदर्भ सामने आया है। मिलबेन ने अपने X अकाउंट पर दो पोस्ट में डिपके को संबोधित करते हुए अमेरिकी दानदाताओं से मिलने वाली कथित आर्थिक सहायता का उल्लेख किया।


14 अक्टूबर की पोस्ट में मिलबेन ने भारत के युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि चुप रहने का समय नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि अभिजीत दिपके और @Cockroachisback को अमेरिका में ऐसे दानदाताओं से फंडिंग मिल रही है, जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके नेतृत्व में देश के भविष्य के खिलाफ हैं। उन्होंने युवाओं से नहीं डरने की अपील भी की।



इसके बाद एक अन्य पोस्ट में मिलबेन ने दिपके से कहा कि अमेरिकी दानदाता तब उनका साथ छोड़ देंगे, जब वे सफल नहीं होंगे। उन्होंने यह भी लिखा कि कानूनविहीनता कभी जीतती नहीं है और दिपके को अपनी अमेरिकी शिक्षा तथा प्रतिभा का इस्तेमाल सकारात्मक उद्देश्यों के लिए करना चाहिए। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी के साथ बैठकर भारत की प्रगति में सकारात्मक भूमिका निभाने की सलाह दी।



इसी पोस्ट में मिलबेन ने दावा किया कि प्रधानमंत्री मोदी को अमेरिकी समर्थन की जरूरत नहीं है। उन्होंने भारत की 1.5 अरब आबादी, मोदी के लंबे राजनीतिक कार्यकाल और 2029 में फिर समर्थन मिलने की संभावना का उल्लेख किया। ये मिलबेन के अपने दावे और राजनीतिक विचार हैं।



जवाब में दिपके ने भी सवाल उठाया कि मोदी अपने ही देशवासियों को बदनाम करने के लिए अमेरिकियों का समर्थन क्यों मांग रहे हैं। उन्होंने यह भी पूछा कि विदेशी नागरिकों को भारत के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप करने का अधिकार किसने दिया।



हालांकि, इस बयानबाजी से कथित विदेशी फंडिंग और विदेशी हस्तक्षेप की पुष्टि नहीं होती I इसलिए फिलहाल यह घटनाक्रम दो पक्षों के सार्वजनिक बयानों और राजनीतिक मतभेद के रूप में सामने आता है। कथित विदेशी फंडिंग को स्थापित तथ्य बताने के लिए केवल सोशल मीडिया पोस्ट पर्याप्त नहीं हैं।