काठमांडू। नेपाल-चीन व्यापार का प्रमुख मार्ग तातोपानी नाका डेढ़ महीने से अधिक समय से बंद है। सीमा पर कंटेनरों की कतार लगी है और दशहरे के लिए मंगाए गए फल, कपड़े, जूते समेत अन्य सामान फंसे हैं। नाका खोलने की तारीख पर चीन ने अब तक चुप्पी साध रखी है।
नाका बंद होने का सिलसिला सावन की शुरुआत में भूस्खलन से अरनिको राजमार्ग बाधित होने के बाद शुरू हुआ। करीब तीन सप्ताह तक व्यापार ठप रहा। सावन के तीसरे सप्ताह में दस दिन सीमित आवाजाही बहाल हुई, लेकिन रसुवा क्षेत्र में 10 भदौ को भीषण बाढ़ के बाद चीन ने 15 भदौ से तातोपानी नाका अगले आदेश तक बंद कर दिया। बंदी की आधिकारिक वजह अब तक स्पष्ट नहीं है।
नाका खुलवाने की पहल के तहत चीनी दूतावास के उपनियोग प्रमुख चाउ फान समेत नेपाली अधिकारियों ने सीमा क्षेत्र का निरीक्षण किया। इसके बावजूद संचालन बहाली की तारीख तय नहीं हो सकी है। कारोबारियों के मुताबिक, चीन के न्यालम क्षेत्र में 45 से अधिक कंटेनर रुके हैं, जबकि कोरला नाके पर दोनों ओर सेब से लदे 120 कंटेनर फंसे हैं।
कारोबारियों ने आशंका जताई है कि दशहरे से पहले फल नहीं पहुंचे तो 40 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हो सकता है। तातोपानी से काठमांडू तक एक कंटेनर की ढुलाई करीब 50 हजार रुपये पड़ती थी, जबकि वैकल्पिक कोरला मार्ग से यही खर्च चार लाख रुपये तक पहुंच रहा है।
नाका बंद होने से चालक, मजदूर और छोटे कारोबारी भी बेरोजगारी की मार झेल रहे हैं। नेपाल और चीन के अधिकारियों के बीच बातचीत जारी है, लेकिन कारोबारियों की नजरें अब नाका खुलने के औपचारिक फैसले पर टिकी हैंl
डेढ़ महीने से बंद तातोपानी नाका, सीमा पर फंसे करोड़ों के सामान : नेपाल
चीन ने नहीं बताई बंदी की वजह, दशहरे के कारोबार पर संकट; 40 करोड़ के फल खराब होने की आशंका
परमात्मा प्रसाद उपाध्याय
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