दिल्ली के कनॉट प्लेस स्थित सेंट्रल पार्क के आसपास 16 अक्टूबर को प्रस्तावित ‘लहरा दो तिरंगा’ मार्च को लेकर हलचल रही। इस कार्यक्रम का आह्वान CJP संस्थापक अभिजीत दीपके ने किया था। प्रदर्शन का संबंध मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग और CJP नेताओं के खिलाफ हुई पुलिस कार्रवाई के विरोध से था।

कार्यक्रम के दौरान लगभग 2,000 लोग वहां एकत्र हुए। मौके पर पुलिस और अर्धसैनिक बलों की तैनाती की गई थी। पुलिस ने शाम तक भीड़ को हटाने के लिए कार्रवाई की।

इस घटनाक्रम ने राजधानी में सार्वजनिक स्थलों पर राजनीतिक विरोध-प्रदर्शन की अनुमति, यातायात प्रबंधन और कानून-व्यवस्था के बीच संतुलन को लेकर सवाल खड़े किए हैं। ऐसे मामलों में प्रशासन की सुरक्षा संबंधी जिम्मेदारियों के साथ शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने के नागरिकों के अधिकार पर भी विचार करना जरूरी है।

हालांकि, प्रदर्शन के दौरान हुई पूरी कार्रवाई, हिरासत में लिए गए लोगों की संख्या और पुलिस द्वारा भीड़ हटाने के सटीक कारणों की पुष्टि के लिए आधिकारिक बयान और अतिरिक्त रिपोर्टों की जांच जरूरी है।