नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने हवाई टिकटों के किराये में मनमानी बढ़ोतरी और कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव को नियंत्रित करने के उद्देश्य से नए नियमों को अंतिम रूप दे दिया है। 16 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट में सरकार ने बताया कि नियमों को प्रशासनिक मंजूरी मिल चुकी है और इन्हें दो सप्ताह के भीतर आधिकारिक राजपत्र में प्रकाशित किए जाने की उम्मीद है।
नए नियम भारतीय वायुयान अधिनियम, 2024 के तहत तैयार किए गए हैं। सरकार की ओर से अदालत को दी गई जानकारी के अनुसार, प्रस्तावित व्यवस्था में एयरलाइंस के लिए किराये की जानकारी सार्वजनिक करने, कीमतों में पारदर्शिता बढ़ाने और यात्रियों की शिकायतों के समाधान की व्यवस्था शामिल होगी।
रिपोर्ट के अनुसार, प्रत्येक मार्ग पर सबसे ऊंचे किराया-स्तर की सीमा निर्धारित करने का प्रावधान भी प्रस्तावित है। इसमें ईंधन की कीमत, परिचालन लागत और महंगाई जैसे कारकों के आधार पर समय-समय पर बदलाव किया जा सकता है।
सुप्रीम कोर्ट में क्यों पहुंचा मामला?
यह मामला सामाजिक कार्यकर्ता एस. लक्ष्मीनारायण की जनहित याचिका से जुड़ा है। याचिका में आरोप लगाया गया कि निजी एयरलाइंस त्योहारों, छुट्टियों और अधिक मांग वाले समय में मनमाने ढंग से किराया बढ़ाती हैं। याचिकाकर्ता ने हवाई किराये की निगरानी के लिए स्पष्ट नियमों और प्रभावी नियामक व्यवस्था की मांग की है। ये आरोप याचिका में लगाए गए हैं; इन्हें सभी एयरलाइंस के खिलाफ सिद्ध तथ्य नहीं माना जाना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से नियमों के आधिकारिक प्रकाशन के बाद उन्हें अदालत के रिकॉर्ड पर रखने और यात्रियों की शिकायतों के समाधान की प्रक्रिया स्पष्ट करने को कहा है। मामले की अगली सुनवाई 16 नवंबर को निर्धारित की गई है।
यात्रियों को कब मिलेगी राहत?
नियमों को अंतिम रूप दिया जाना एक महत्वपूर्ण कदम है, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि हवाई टिकटों की कीमतें तत्काल कम हो जाएंगी। यात्रियों को मिलने वाली वास्तविक राहत नियमों के अंतिम प्रकाशित स्वरूप, उनके लागू होने और अनुपालन की प्रभावशीलता पर निर्भर करेगी।
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