नई दिल्ली: दिल्ली हाईकोर्ट के पास मथुरा रोड पर पैदल यात्रियों की सुरक्षा का मुद्दा सुप्रीम कोर्ट में उठा। 16 अक्टूबर को सुनवाई के दौरान जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस केवी विश्वनाथन की पीठ ने केंद्र सरकार से इस मामले में ठोस कदम उठाने पर जोर दिया।
अदालत ने मौखिक रूप से चेतावनी दी कि यदि 25 नवंबर तक प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई, तो न्यायाधीश दिल्ली हाईकोर्ट के बाहर धरने पर बैठ सकते हैं।
सुनवाई में अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल विक्रमजीत बनर्जी ने बताया कि केंद्र की हाई-लेवल कमेटी इस स्थान पर जरूरी उपायों की समीक्षा कर रही है।
पीठ ने स्पष्ट किया कि केवल समिति का विचार-विमर्श पर्याप्त नहीं है। जरूरत पड़ने पर दिल्ली के मुख्य सचिव को भी अदालत में बुलाया जा सकता है।
इससे पहले, न्यायमित्र और वरिष्ठ अधिवक्ता गौरव अग्रवाल ने बताया था कि वहां रेड लाइट लगाई गई है। अदालत ने स्पीड ब्रेकर और रंबल स्ट्रिप्स जैसे अतिरिक्त सुरक्षा उपायों का सुझाव भी दिया था। यह स्थान दिल्ली हाईकोर्ट और राष्ट्रीय प्राणी उद्यान के पास है, जहां पैदल यात्रियों की आवाजाही होती है।
सुनवाई में सड़क दुर्घटना मुआवजे से जुड़ी अंतरिम राहत योजना और वार्षिक सड़क दुर्घटना रिपोर्टों के प्रकाशन में देरी का मुद्दा भी उठा। अदालत ने योजना को राजपत्र में प्रकाशित करने और उसका व्यापक प्रचार करने पर जोर दिया।
मामले में अगली महत्वपूर्ण तारीख 25 नवंबर है। तब तक संबंधित अधिकारियों की कार्रवाई पर ध्यान रहेगा।Source:live law
सुप्रीम कोर्ट सख्त, क्रॉसिंग पर 25 नवंबर की डेडलाइन, धरने की चेतावनी
दिल्ली हाईकोर्ट और राष्ट्रीय प्राणी उद्यान के पास मथुरा रोड पर पैदल यात्रियों की सुरक्षा का मामला फिर अदालत में उठा। केंद्र ने हाई-लेवल कमेटी के विचाराधीन होने की जानकारी दी, जबकि सुप्रीम कोर्ट ने ठोस कार्रवाई पर जोर दिया।
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