नई दिल्लीlभारत ने आर्द्रभूमि (वेटलैंड्स) और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में अपनी वैश्विक प्रतिबद्धता को और मजबूत करते हुए दो नए जलक्षेत्रों को अंतरराष्ट्रीय रामसर सूची में शामिल कराया है।

 केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने आधिकारिक घोषणा करते हुए बताया कि चंडीगढ़ की 'सुखना आर्द्रभूमि' (Sukhna Wetland) और उत्तर प्रदेश की 'सौज झील' (Sauj Jheel) को नवीनतम रामसर स्थलों के रूप में मान्यता मिल गई है। इन दो नए स्थलों के जुड़ने के साथ ही भारत में रामसर स्थलों की कुल संख्या बढ़कर 103 हो गई है।
​पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने X पर एक पोस्ट के माध्यम से बताया की यह उपलब्धि जैव विविधता के संरक्षण, जल व जलवायु सुरक्षा को बढ़ावा देने और स्थानीय समुदायों की आजीविका को निरंतर संबल प्रदान करने के प्रयासों का परिणाम है।

2 फरवरी 1971 को ईरान के रामसर शहर में हस्ताक्षरित यह अंतरराष्ट्रीय संधि दुनिया भर में आर्द्रभूमियों (वेटलैंड्स) के क्षरण को रोकने और उनके विवेकपूर्ण उपयोग को सुनिश्चित करने के लिए समर्पित है। भारत 1 फरवरी 1982 को इस संधि में शामिल हुआ । अब 103 आधिकारिक रामसर स्थलों के साथ वैश्विक पटल पर आर्द्रभूमि संरक्षण का एक प्रमुख केंद्र बन चुका है।

सुखना झील: शिवालिक की तलहटी में प्रवासी परिंदों का सुरक्षित बसेरा
चंडीगढ़ शहर की सीमा पर और शिवालिक (बाहरी हिमालय) की तलहटी में स्थित सुखना झील (रामसार साइट सं. 2602) लगभग 565 एकड़ में फैली है, जिसका जलग्रहण क्षेत्र 10,000 एकड़ से अधिक है। यह झील 'सेंट्रल एशियन फ्लाईवे' (Central Asian Flyway) के जरिए आने वाले हजारों शीतकालीन प्रवासी पक्षियों का प्रमुख विश्राम स्थल है। यहां कॉमन पोचार्ड (Common Pochard) और संकटग्रस्त पल्लास फिश ईगल जैसे दुर्लभ पक्षियों के अलावा ब्लैक पॉन्ड कछुए भी पाए जाते हैं। यह झील भूजल पुनर्भरण, शहरी पारिस्थितिकी संतुलन और जलवायु नियमन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

​सौज झील: यूपी का 14वां रामसार स्थल और सारस क्रेन का प्राकृतिक आवास
उत्तर प्रदेश के मैनपुरी जिले की किशनी तहसील में स्थित सौज झील (रामसार साइट सं. 2603) गंगा के बाढ़ के मैदानों में स्थित एक उथली और मौसमी झील है। यह क्षेत्र राज्य पक्षी 'सारस क्रेन' (Sarus Crane) और संकटापन्न 'ग्रेटर स्पॉटेड ईगल' के प्रमुख प्रजनन और प्राकृतिक आवास के लिए विख्यात है।
​सौज झील के शामिल होने से उत्तर प्रदेश में रामसार स्थलों की कुल संख्या बढ़कर 14 हो गई है। इसके साथ ही मैनपुरी अब 'समान पक्षी विहार' और 'सौज झील' के रूप में दो-दो अंतरराष्ट्रीय रामसार स्थल रखने वाला उत्तर प्रदेश का महत्वपूर्ण जिला बन गया है।


​केंद्रीय मंत्री के अनुसार, यह नवीनतम संरक्षण देश के समृद्ध आर्द्रभूमि पारिस्थितिक तंत्र के संरक्षण के प्रति भारत के निरंतर संकल्प तथा इनसे मिलने वाले पारिस्थितिक, जलवायु व आजीविका लाभों को मजबूती प्रदान करता है।

इस महत्वपूर्ण उपलब्धि पर केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने उत्तर प्रदेश और चंडीगढ़ को बधाई दी। इसके साथ ही उन्होंने देश-विदेश के पर्यटकों और प्रकृति प्रेमियों से अपील की कि वे जब भी समय मिले, सुखना आर्द्रभूमि और सौज झील की प्राकृतिक सुंदरता व जैव विविधता का दीदार करने के लिए वहाँ का दौरा अवश्य करें।