लंदन में 16 अक्टूबर 2026 को भारतीय उच्चायोग के बाहर भारत की चुनावी प्रक्रिया और केंद्र सरकार के समर्थन को लेकर दो समूहों ने अलग-अलग प्रदर्शन किए। एक ओर स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI-UK) के नेतृत्व में प्रदर्शनकारी जुटे, जबकि दूसरी ओर भारतीय सरकार के समर्थकों ने जवाबी प्रदर्शन किया। समाचार एजेंसी पीटीआई ने यह जानकारी दी।

SFI-UK का प्रदर्शन ‘स्टैंड इन सॉलिडैरिटी’ के बैनर तले आयोजित किया गया। संगठन ने चुनावी प्रक्रिया में जवाबदेही और पारदर्शिता की मांग उठाई। यह प्रदर्शन लंदन स्थित इंडिया हाउस के बाहर सप्ताह के शुरुआती दिनों में हुए एक अन्य विरोध प्रदर्शन के बाद आयोजित किया गया था। पहले प्रदर्शन का उद्देश्य कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) की मांगों को समर्थन देना था।

इन मांगों में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने और मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को समाप्त करने की मांग शामिल थी। ये प्रदर्शन भारत में चुनावी प्रक्रिया को लेकर उठाए जा रहे सवालों और विरोध प्रदर्शनों की पृष्ठभूमि में हुए। हालांकि, उपलब्ध रिपोर्ट में चुनावी अनियमितताओं के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि करने वाले प्रमाण प्रस्तुत नहीं किए गए हैं।

SFI-UK ने अपने बयान में कहा कि संगठन मतदाताओं के अधिकारों और भारतीय लोकतंत्र के समर्थन में प्रदर्शन कर रहा है। इसके विपरीत, सरकार समर्थक प्रदर्शनकारियों ने प्रधानमंत्री के नेतृत्व और सरकार के प्रति अपना भरोसा व्यक्त किया।

लंदन में रहने वाले उद्यमी राहुल काले ने पीटीआई से बातचीत में कहा कि भारत-ब्रिटेन मुक्त व्यापार समझौते से निर्यात के नए अवसर खुलने की संभावना है। उन्होंने यह भी कहा कि उनके विचार में ऐसे प्रदर्शन निवेशकों के भरोसे को प्रभावित कर सकते हैं। इंडियन डायस्पोरा इन द यूके के संस्थापक-निदेशक हिर्देश गुप्ता ने भी प्रधानमंत्री मोदी के प्रति समर्थन जताया।

रिपोर्ट के अनुसार, लंदन में आने वाले दिनों में और प्रदर्शन तथा जवाबी प्रदर्शन आयोजित किए जाने की योजना थी। हालांकि, उपलब्ध जानकारी से इन आयोजनों के अंतिम परिणाम या चुनावी मांगों पर किसी आधिकारिक निर्णय की पुष्टि नहीं होती।