बढ़नी, सिद्धार्थनगर। मधवानगर गांव के काली माता मंदिर से घंटा चोरी होने और बाद में बढ़नी बाजार की एक बर्तन दुकान पर मिलने की घटना ने कई सवाल खड़े किए हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, मंदिर से घंटा गायब होने की जानकारी मिलने के बाद बाबा पीलू दास बाजार पहुंचे। इसके बाद घंटा एक दुकान पर मिलने की बात सामने आई। हालांकि, चोरी की पूरी घटना कैसे हुई और संदिग्ध व्यक्ति की पहचान क्या है, इस बारे में स्पष्ट जानकारी उपलब्ध नहीं है।

घटनाक्रम के मुताबिक, बाबा पीलू दास ( रामसागर यादव) ने दुकान पर पहुंचकर दुकानदार से मंदिर का घंटा चोरी होने के संबंध में पूछताछ की। बताया जाता है कि उस समय दुकान पर करीब आधा दर्जन लोग मौजूद थे। इसके बावजूद संदिग्ध व्यक्ति वहां से भाग निकला। वह किस परिस्थिति में भागा और मौजूद लोगों में से किसी ने उसे रोकने की कोशिश की या नहीं, इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

दुकान तक घंटा पहुंचने का रास्ता भी जांच का अहम बिंदु है। मालगोदाम रोड पर बर्तनों की अन्य दुकानें भी हैं। ऐसे में संबंधित दुकान का चुनाव कैसे हुआ और क्या संदिग्ध व्यक्ति दुकानदार को पहले से जानता था, इन सवालों के जवाब अभी सामने नहीं आए हैं। हालांकि, केवल एक दुकान पर घंटा मिलने के आधार पर दुकानदार या वहां मौजूद किसी अन्य व्यक्ति की संलिप्तता मान लेना उचित नहीं होगा।

इस मामले में बाबा के सीधे उसी दुकान पर पहुंचने को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। बताया जाता है कि दुकान भारत-नेपाल सीमा से लगभग 20 मीटर दूर है। लेकिन बाबा को दुकान की जानकारी किसने दी, यह स्पष्ट नहीं है। इसी तरह, उपलब्ध विवरण से यह साबित नहीं होता कि संदिग्ध व्यक्ति ने सीमा पार की थी या घटना का किसी तरह की सीमा पार तस्करी से संबंध था।

बताया जा रहा है कि पुलिस को घटना की जानकारी मिलने के बाद घंटा बरामद होने और उसे मंदिर वापस पहुंचाने की बात सामने आई। हालांकि, पुलिस की आधिकारिक पुष्टि, दर्ज शिकायत, संदिग्ध की पहचान और अब तक की जांच के बारे में विस्तृत जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई है।

घंटे की बरामदगी के बावजूद चोरी की परिस्थितियों को स्पष्ट करना जरूरी है। सीसीटीवी फुटेज, दुकानदार और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान तथा संदिग्ध की पहचान से जुड़े तथ्य सामने आने पर ही घटनाक्रम की विश्वसनीय तस्वीर बन सकेगी। फिलहाल, सामने आए सवालों को आरोप के बजाय जांच के संभावित बिंदुओं के रूप में देखना चाहिए।