नई दिल्ली, 13 अक्टूबर। दिल्ली में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान पात्रता साबित करने के लिए नोटिस पाने वाले लगभग 33.1 लाख मतदाताओं में से 20 लाख मामलों का निपटारा किया जा चुका है। दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) के कार्यालय की ओर से सोमवार को उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के अनुसार, यह संख्या नोटिस पाने वाले मतदाताओं के 60 प्रतिशत से अधिक है।
रिपोर्ट के मुताबिक, इन 20 लाख मामलों में वे मतदाता शामिल हैं जिनकी जानकारी सत्यापित की गई है और जिन्हें अंतिम मतदाता सूची में शामिल किया जाएगा। इसमें वे मामले भी शामिल हैं जिनमें नोटिस खारिज कर दिए गए हैं। इसलिए निपटाए गए मामलों की कुल संख्या को अंतिम सूची में शामिल होने वाले मतदाताओं की संख्या नहीं माना जा सकता।
नोटिसों के निपटारे की गति सितंबर के अंत के बाद बढ़ी। 31 अगस्त को मसौदा मतदाता सूची प्रकाशित होने से 29 सितंबर तक लगभग चार लाख नोटिसों का निपटारा हुआ था। इसके बाद अगले 12 दिनों में करीब 16 लाख मामलों का निपटारा किया गया। रिपोर्ट के अनुसार, इस अवधि में प्रतिदिन औसतन लगभग 1.33 लाख नोटिस निपटाए गए।
दिल्ली में SIR शुरू होने से पहले लगभग 1.45 करोड़ मतदाता थे। 31 अगस्त को प्रकाशित मसौदा सूची में 97.5 लाख मतदाताओं के नाम शामिल थे। शेष लगभग 47.5 लाख मतदाताओं को अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत या दोहरी प्रविष्टि जैसी श्रेणियों के तहत सूची से हटाया गया था।
मसौदा सूची में शामिल 97.5 लाख मतदाताओं में से लगभग 33.1 लाख को अपनी पात्रता साबित करने के लिए नोटिस जारी किए गए। इनमें 13.79 लाख मतदाता ऐसे थे जिनका नाम 2002 की पिछली SIR मतदाता सूची से नहीं जोड़ा जा सका, जबकि 19.33 लाख मामलों में गणना प्रपत्रों में तार्किक विसंगतियां दर्ज की गईं।
रिपोर्ट के मुताबिक, 26 सितंबर को निर्वाचन आयोग ने सुनवाई की प्रक्रिया सरल की। तार्किक विसंगतियों और पुराने रिकॉर्ड से नाम न जुड़ पाने के मामलों में मतदाताओं को स्थानीय कार्यालय में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने की अनिवार्यता समाप्त की गई। बूथ-स्तरीय अधिकारियों (BLO) को घर जाकर दस्तावेज एकत्र करने की जिम्मेदारी दी गई। ऑनलाइन सुनवाई की सुविधा भी मजबूत की गई और परिवार के सदस्यों को मतदाता की ओर से उपस्थित होने की अनुमति दी गई।
इसके अतिरिक्त, सहायक निर्वाचन पंजीकरण अधिकारियों की संख्या 297 से बढ़ाकर 902 की गई और विशेष शिविर आयोजित किए गए। अधिकारियों ने प्रक्रिया में तेजी का श्रेय सरल नियमों, अतिरिक्त कर्मचारियों और BLO के लिए निर्धारित लक्ष्यों को दिया।
रिपोर्ट के अनुसार, नोटिसों और आपत्तियों के निपटारे की प्रक्रिया 30 नवंबर तक जारी रह सकती है। अंतिम मतदाता सूची 4 दिसंबर को प्रकाशित करने की समयसीमा तय की गई हैI
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