विशाखापत्तनम में कथित जासूसी मामले की जांच में जांचकर्ताओं ने सोशल मीडिया और WhatsApp के जरिए नौसेना से जुड़े लोगों को कथित तौर पर फंसाने और उनसे संवेदनशील जानकारी हासिल करने के तरीके का पता लगाने का दावा किया है। The Indian Express की खबर के अनुसार, इस मामले में दो लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि 16 अन्य लोगों की भूमिका की जांच की जा रही है।
जांचकर्ताओं के अनुसार, करीब छह महीने पहले एक महिला ऑपरेटिव ने खुद को एक शिपिंग कंपनी की कर्मचारी बताकर 28 वर्षीय अन्नम साई वरप्रसाद से सोशल मीडिया पर संपर्क किया। वरप्रसाद विशाखापत्तनम नौसैनिक अड्डे पर नौसेना अधिकारियों के वाहनों को चलाने के लिए संविदा पर नियुक्त नागरिक कर्मचारी था। रिपोर्ट के अनुसार, बातचीत पहले निजी जानकारी से शुरू हुई और बाद में उसके काम, वेतन तथा वह किन अधिकारियों को वाहन उपलब्ध कराता है, जैसे सवालों तक पहुंची।
जांचकर्ताओं का आरोप है कि महिला ने बाद में वरप्रसाद को अश्लील सामग्री भेजी और विशाखापत्तनम आने तथा उससे मिलने की बात कही। इसके बाद कथित तौर पर उसे उसके नियोक्ता को रिपोर्ट करने और गिरफ्तारी की धमकी दी गई। जांचकर्ताओं के मुताबिक, इसी तरह के दबाव के जरिए उससे नौसैनिक परिसंपत्तियों की स्थिति और अधिकारियों की तैनाती से संबंधित जानकारी मांगी गई।
रिपोर्ट के अनुसार, बातचीत बाद में WhatsApp पर स्थानांतरित हो गई। हालांकि वरप्रसाद के पास बुनियादी सुरक्षा मंजूरी थी, लेकिन जांचकर्ताओं का कहना है कि उसे वर्गीकृत परिसंपत्तियों, नौसैनिक जहाजों के डॉकिंग या पनडुब्बियों की आवाजाही को देखने और रिपोर्ट करने की सीधी पहुंच नहीं थी। जांचकर्ता यह भी देख रहे हैं कि क्या उसे क्रिप्टोकरेंसी के माध्यम से कोई भुगतान मिला था।
जांच में एक अन्य व्यक्ति 31 वर्षीय प्रशिक्षु नाविक प्रदीप मुखर्जी का नाम सामने आया। जांचकर्ताओं के अनुसार, वरप्रसाद ने उसके बारे में जानकारी साझा की थी। आरोप है कि प्रदीप को भी पाकिस्तान-आधारित एक ऑपरेटिव ने मेडिकल प्रोफेशनल के रूप में पहचान बताकर संपर्क किया। अश्लील संदेशों के आदान-प्रदान के बाद गिरफ्तारी और कानूनी कार्रवाई की धमकी देकर उससे जानकारी साझा करने के लिए दबाव डाला गया।
जांचकर्ताओं के अनुसार, प्रदीप से पाकिस्तान-आधारित ऑपरेटिव्स के WhatsApp खातों को सक्रिय करने के लिए OTP भी साझा करवाए गए। इन WhatsApp नंबरों का इस्तेमाल बाद में कम से कम 16 अन्य लोगों को कथित तौर पर फंसाने के लिए किया गया। रिपोर्ट के मुताबिक, ये लोग केरल, महाराष्ट्र, कर्नाटक, गुजरात, गोवा, दिल्ली, तमिलनाडु, छत्तीसगढ़ और बिहार में तैनात थे। जांच में नौसैनिक जहाजों और पनडुब्बियों के आने-जाने की जानकारी मांगे जाने की बात सामने आई है।
आंध्र प्रदेश पुलिस की Counter Intelligence Cell और नौसेना अधिकारियों ने वरप्रसाद पर एक महीने से अधिक समय तक निगरानी रखी। रिपोर्ट के अनुसार, दोनों के खिलाफ मामला 2 सितंबर को दर्ज किया गया और बाद में निगरानी बढ़ाई गई। 1 अक्टूबर को “Operation Firewall 2026” के तहत 18 लोगों के घरों और परिसरों पर एक साथ छापे मारे गए। इनमें 13 नौसेना कर्मी शामिल थे। 12 टीमों ने अभियान में हिस्सा लिया और फोन, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण तथा दस्तावेज जब्त किए गए।
वरप्रसाद को विशाखापत्तनम और मुखर्जी को कोयंबटूर से गिरफ्तार किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, जांचकर्ता बाकी 16 लोगों की भूमिका और उनकी कथित संलिप्तता के स्तर का पता लगा रहे हैं।
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